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नॉर्थ ब्लॉक में दिखेगा हड़प्पा से चोल साम्राज्य तक का इतिहास

इतिहास गाथा: युगे युगीन म्यूजियम की एक गैलरी का प्लान तैयार, 100 दुर्लभ वस्तुएं होंगी प्रदर्शित

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नई दिल्ली. भारत का सबसे ताकतवर कॉरिडोर माना जाने वाला नॉर्थ ब्लॉक अब खाली हो चुका है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत इसे अब एक नया रूप दिया जा रहा है जो भारत का इतिहास और विकास गाथा दर्शाएगा। इसी कड़ी में यहां एक नई गैलरी बनाई जा रही है जिसका नाम होगा टाइम एंड टाइमलेसनेस। यह गैलरी करीब 1,500 वर्गमीटर में बनेगी और इसमें देशभर के संग्रहालयों और कलेक्शनों से लाई गईं करीब 100 दुर्लभ वस्तुएं रखी जाएंगी। इसका मकसद भारत की सभ्यता और समय के बीच का रिश्ता दिखाना है। यह गैलरी बताएगी कि किस तरह भारत ने समय को दार्शनिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक रूप से समझा और जिया है।

हजारों साल की गाथा यहां दिखेगी

यह गैलरी युगे युगीन भारत म्यूजियम का हिस्सा होगी, जो नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में तैयार किया जा रहा है। इसमें हजारों साल पुराने अवशेष रखे जाएंगे। जैसे- कालीबंगन (हड़प्पा सभ्यता) की मिट्टी की रेत-घड़ी (2500-1700 ईसा पूर्व), तमिलनाडु की चोल कालीन कांस्य मूर्तियां (10वीं-11वीं सदी), लाहौर का नक्षत्र यंत्र (1567 ईस्वी), गुप्त काल की मूर्ति कला (5वीं सदी)।

गैलरी में सूर्यघड़ी, जलघड़ी, नटराज प्रतिमा भी

गैलरी दो खंडों में होगी, काल-अवधारणा, जो समय को एक दार्शनिक अवधारणा के रूप में दर्शाता है और काल-गणना, जो समय का मापा हुआ विज्ञान है। विज्ञान और गणित खंड में सूर्यघड़ी, जलघड़ियां और खगोलीय पांडुलिपियों जैसे उपकरण होंगे। वहीं, दार्शनिक खंड में नटराज कांस्य प्रतिमा जैसी ऐतिहासिक कलाकृतियां और सूर्य, विष्णु और पौराणिक काल चक्रों के चित्रण प्रदर्शित होंगे। आर्यभट्ट द्वारा रचित आर्यभटीय के अंशों जैसी प्रमुख पांडुलिपियों और ग्रंथों का प्रदर्शन भी होगा।

इसलिए रखा युगे युगीन नाम

इस म्यूजियम का मुख्य विषय भारत की 5,000 साल पुरानी सभ्यता है। इसका नाम युगे युगीन इसलिए रखा गया है क्योंकि यह भारत की निरंतर चलती आ रही परंपराओं को दर्शाता है। यह सिर्फ इतिहास नहीं बताएगी, बल्कि समय (काल) को दार्शनिक सोच, विज्ञान और जीवन के अनुभव के रूप में दिखाएगी।

पेरिस के लौव्र म्यूजियम से भी बड़ा

पूरा म्यूजियम कॉम्प्लेक्स करीब 1,55,000 वर्गमीटर का होगा और हर साल 1 करोड़ से ज्यादा लोगों के यहां आने की उम्मीद है। यह दुनिया का सबसे बड़ा म्यूजियम बनने जा रहा है, जो पेरिस के लौव्र म्यूजियम से भी बड़ा होगा। भारत व फ्रांस ने दिसंबर 2024 में मिलकर इसके लिए तकनीकी सहयोग का समझौता भी किया है। पहली गैलरी को एक साल से भी कम समय में पूरा करने की योजना है।