
मोहनदास करमचंद गांधी
नई दिल्ली. ‘दे दी हमें आजादी बिना खडग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल’। देश की आजादी में महात्मा गांधी के यागदोन को देश नमन कर रहा है। देशभर में पिछले कई दिनों से गांधी जयंती की तैयारियां चल रही हैं। गांधीजी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनकी मां का नाम पुतलीबाई और पिता करमचंद गांधी थे। मोहनदास करमचंद गांधी अपने परिवार में सबसे छोटे थे लेकिन, उन्होंने बहुत बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। इसीलिए उन्हें राष्ट्रपिता भी कहा जाता है। भारत आने के बाद गांधीजी ने चंपारण सत्याग्रह चलाया, जिसके जरिए उन्होंने 1917 में बिहार के चम्पारण जिले में किसानों को अंग्रेजों द्वारा जबरदस्ती नील की खेती कराए जाने से मुक्ति दिलाई। इसके बाद इसी साल उन्होंने गुजरात प्रदेश के खेड़ा जिले में बाढ़ और अकाल की स्थिति होने के बावजूद लगान वसूले जाने का अहिंसक विरोध कर अंग्रेजों को समझौता करने पर मजबूर किया।
ऐसे कहलाए महात्मा और राष्ट्रपिता
इन सफल आन्दोलनों कि वजह से गांधीजी की कीर्ति पूरे भारत में फैल गई थी। आंदोलनों की सफलता के बाद ही उन्हें गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा "महात्मा" और नेताजी सुभाषचन्द्र बोस द्वारा "राष्ट्रपिता" की उपाधि मिली। बाद में उन्हें सभी इसी नाम से पुकारने लगे।
शुक्रवार से था अजब नाता
गांधीजी का शुक्रवार के साथ अजब ही नाता था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 में शुक्रवार को हुआ था। देश की आजादी के लिए उन्होंने लम्बी लड़ाई लड़ी। भारत को स्वतंत्रता 15 अगस्त 1947 को शुक्रवार को ही मिली थी। गांधीजी की हत्या भी 30 जनवरी 1948 को शुक्रवार को ही हुई थी।
विरोधी भी झुकाते थे सिर
दुनिया में महात्मा गांधी के आदर को इस बात से समझा जा सकता है कि जिस देश से भारत को आजादी दिलाने के लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी, उसी ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया। जी हां, ब्रिटेन ने उनके निधन के 21 साल बाद उनके नाम से डाक टिकट जारी किया। गांधी जी का जन्मदिन 2 अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय अंहिसा दिवस के रूप में विश्वभर में मनाया जाता है।
Updated on:
01 Oct 2019 11:37 pm
Published on:
02 Oct 2019 12:01 am
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