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IIT Delhi: आईआईटी दिल्ली के रिसर्च स्कॉलर दुष्यंत कुमार ने तैयार की कंप्रेस बायोगेस फ्लूय किट, जानिए क्या है किट में खास?

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली में देश भर की आईआईटीज की रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए दो दिवसीय रिसर्च एंड डेवलपमेंट फेयर आईइन्वेटिव-2022 का बीते दिनों आयोजन हुआ। इसमें काफी संख्या में आईआईटी के छात्रों व रिसर्च स्कॉलर्स ने अपने इनोवेशन को प्रस्तुत किया। इनमें से आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी (सीआरडीटी) के रिसर्च स्कॉलर दुष्युंत कुमार ने कंप्रेस्ड बायोगेस से चलने वाली किट तैयार की है।

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IIT Delhi: आईआईटी के रिसर्च स्कॉलर दुष्यंत कुमार ने तैयार की कंप्रेस बायोगेस फ्लूय किट, जानिए क्या है किट में खास?

आईआईटी दिल्ली के रिसर्च स्कॉलर ने तैयार की है कंप्रेस्ड बायोगेस फ्यूल किट। 58 रुपये में 1 किलो कंप्रेस्ड बायोगैस से 120 से 125 किमी दौड़ेगी स्कूटी।

आईआईटी दिल्ली के रिसर्च स्कॉलर दुष्युंत कुमार द्वारा तैयार की गई कंप्रेस्ड बायोगेस किट को स्कूटी पर लगाकर इसे चलाया जा सकता है। सीआरडीटी के एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग के प्रो वीरेंद्र कुमार विजय और प्रो राम चंद्रण ने दुष्यंत का नेतृत्व किया है। दुष्यंत कुमार बताया है कि सीआरडीटी में इन हाउस बायोगैस प्रोडक्शन प्लांट मौजूद है। इस प्लांट में किचन वेस्ट का उपयोग करके कंप्रेस्ड बायोगैस फ्यूल को विकसित किया है। जिसकी क्षमता 90 से 93 फीसद ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीएस) - 6 के नॉमर्स के अधीन है।

दुष्यंत ने बताया कि इसमें 60 फीसद मीथने और 40 फीसद कार्बन डायऑक्साइड जनरेट होता है। इस प्लांट के माध्यम से इस अनुरूप ढाला जाता है कि यह स्कूटी में बीएस-6 की क्षमता तक ढल सके। उन्होंने बताया कि प्लांट से कंप्रेस्ड बायोगैस फ्यूल तैयार किया है, जिससे एक किलोग्राम कंप्रेस्ड बायोगैस फ्यूल से 58 रुपये की लागत में 120 से 125 किलोमीटर स्कूटी दौड़ेगी। 1 किलो सीएनजी से स्कूटी 125 से 130 किमी तक दौड़ती है।

बाजार में उतारने में इडंस्ट्री के प्रतिनिधियों से हुई बातचीत

दुष्यंत ने बताया कि फेयर में कई ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने इस इनोवेशन को आगे ले जाने के सिलसिले में फेयर में बातचीत की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगले पांच से सात सालों में अपनी इनोवेशन को बाजार में उतार सकते हैं। इसके लिए सेफ्टी मेजर्स व ईमीशन को चेक किया जा रहा है। जिससे यह एक सुरक्षित प्रोडक्ट के रूप में विकसित हो जाए।

तीन हॉस्टल से करते हैं किचन वेस्ट कलेक्ट

दुष्यंत कुमार ने बताया कि आईआईटी दिल्ली के तीन हॉस्टल से प्रति दिन 250 किलो किचन वेस्ट लिया जाता है। उसे संस्थान के सीआरडीटी के इन हाउस बायोगैस प्लांट में डालकर उसे डीग्रेड किया जाता है। प्रति दिन 25 क्यूबिक मीटर कंप्रेस्ड बायोगैस फ्यूल जनरेट किया जा रहा है। यानी एक दिन में 25 हजार किलो कंप्रेस्ड बायोगैस फ्यूल प्लांट से जनरेट किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किचन वेस्ट के सड़ने के बाद इसे एक बेहतर रिन्यूबेल इनर्जी के रूप में विकसित किया जा सकता है।

वर्ष 2018 में आया आइडिया

दुष्यंत ने वर्ष 2006 से 2010 में आईएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज गाजियाबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वर्ष 2011 से 2013 के दौरान इंडस्ट्री ट्राइबोलॉजी मशीन डायनामिक्स एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक की। ITMDIV का अब सेंटर फॉर ऑटोमोटिव रिसर्च एंड ट्राइबोलॉजी (सीएआरटी) के नाम से जाना जाता है। दुष्यंत ने बताया कि इसके बाद डेढ़ साल बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर उन्होंने जीएलए यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर्स को छात्रों को पढ़ाया। इसके बाद वर्ष 2018 में सीआरडीटी को ज्वाइन किया। जहां पर वह उन्नत भारत अभियान से जुड़े। तब उन्हें बायोगैस फ्यूल से इनोवेशन व रिसर्च का आइडिया आया।

ओएनजीसी, गेल जैसी कंपनियां खरीद सकती हैं गैस

दुष्यंत ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वर्ष 2018 में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री रहते हुए सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टूवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन (एसएटीएटी) इनिशिएटिव की शुरुआत की थी। इस इनिशिएटिव के तहत ONGC, IOCL व GAIL जैसी कंपनियां किसी भी प्राकृतिक गैसों के मैन्युफैक्चरर से गैस खरीद सकती हैं।

पांच से सात सालों में बाजार में उतारने की है उम्मीद

दुष्यंत ने बताया कि IInventiv-2022 फेयर में कई ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने इस इनोवेशन को आगे ले जाने के सिलसिले में फेयर में बातचीत की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगले पांच से सात सालों में अपनी इनोवेशन को बाजार में उतार सकते हैं। इसके लिए सेफ्टी मेजर्स व ईमीशन को चेक किया जा रहा है। जिससे यह एक सुरक्षित प्रोडक्ट के रूप में विकसित हो जाए।

सीएनजी स्टेशन नेटवर्क में कंप्रेस्ड बायोगैस का इस्तेमाल

दुष्यंत ने बताया कि स्कूटी में 18 किलो वजनी कंप्रेस्ड बायोगैस फ्यूल को कैरी करने वाली कंवर्टिबल किट तैयार की है। यह स्कूटी में फिट हो सकती है और साथ ही स्कूटी का पेट्रोल ईंधन से भी चल सकती है। सीएनजी के तहत ही 200 बार के प्रेशर से यह कंप्रेस्ड बायोगैस इस कीट में डाला सकता है। दिल्ली समेत अन्य जगहों पर मौजूद सीएनजी स्टेशनों के नेटवर्क में कंप्रेस्ड बायोगैस का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे हम सीएनजी की निर्भरता पर भी कमी ला सकते हैं।

ONGC, IOCL व GAIL खरीद सकते हैं कंप्रेस्ड बायोगैस

दुष्यंत ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वर्ष 2018 में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री रहते हुए सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टूवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन (SATAT) इनिशिएटिव की शुरुआत की थी। इस इनिशिएटिव के तहत ONGC, IOCL व GAIL जैसी कंपनियां किसी भी प्राकृतिक गैसों के मैन्युफैक्चरर से गैस खरीद सकती हैं। दुष्यंत ने उम्मीद जताई है कि यह कंपनियां उनके द्वारा तैयार की गई कंप्रेस्ड बायोगैस फ्यूल को खरीद सकती हैं।