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जूनियर अधिकारी के प्रमोशन पर भड़के सीनियर, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Delhi High Court: नियमों के मुताबिक, पदोन्नति के लिए एक निश्चित सेवा अवधि जरूरी थी और अधिकतम दो साल की छूट दी जा सकती थी। लेकिन छह महीने की यह देरी उन्हें उस सीमा से बाहर कर रही थी।

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IOFS Seniors officers file petition in Delhi High Court Decision against junior officer promotion

दिल्ली हाईकोर्ट पदोन्नति मामला।

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि सरकारी नियुक्ति में अगर देरी प्रशासनिक कारणों से हुई हो तो उसका नुकसान कर्मचारियों को नहीं झेलना चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि भारतीय आयुध निर्माणी सेवा (IOFS) के दो अधिकारियों की पदोन्नति में देरी उनकी गलती नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह सरकार की प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा थी। इसलिए वे पदोन्नति के पात्र हैं। यह फैसला जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने सुनाया। विवाद की शुरुआत तब हुई जब भारतीय आयुध निर्माणी सेवा (IOFS) के 2006 बैच में चयनित दो अधिकारियों को नियुक्ति पत्र मिलने में छह महीने की देरी हो गई।

सीनियर अधिकारियों ने लगाई याचिका

भारतीय आयुध निर्माण सेवा के दो सीनियर अधिकारियों ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि उनके एक अन्य बैचमेट को 31 दिसंबर 2007 को ही नियुक्ति पत्र मिल गया था और उसने उसी दिन पदभार संभाल लिया। लेकिन बाकी दोनों अधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रियागत विलंब के कारण 30 जून 2008 तक इंतजार करना पड़ा। बाद में जब जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (JAG) में पदोन्नति का समय आया तो उनके जूनियर अधिकारी को पदोन्नति मिल गई, लेकिन इन दोनों को यह कहकर अयोग्य ठहरा दिया गया कि उनके पास आवश्यक सेवा अवधि पूरी नहीं है। नियमों के मुताबिक, पदोन्नति के लिए एक निश्चित सेवा अवधि जरूरी थी और अधिकतम दो साल की छूट दी जा सकती थी। लेकिन छह महीने की यह देरी उन्हें उस सीमा से बाहर कर रही थी।

न्यायाधिकरण का फैसला और सरकार की आपत्ति

लाइव लॉ के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने इस फैसले को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में चुनौती दी। न्यायाधिकरण ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि चूंकि देरी उनकी गलती नहीं थी, इसलिए उन्हें भी उसी तारीख से “काल्पनिक पदोन्नति” (notional promotion) दी जानी चाहिए जिस तारीख से उनके जूनियर को मिली थी। इस आदेश से असंतुष्ट होकर भारत सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सरकार का कहना था कि नियमों के अनुसार पात्रता पूरी न करने पर पदोन्नति नहीं दी जा सकती, और इन अधिकारियों की सेवा अवधि निर्धारित सीमा से कम है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने तथ्यों की जांच के बाद पाया कि दोनों अधिकारी अपने बैच में सीनियर थे, और उनकी नियुक्ति में देरी पूरी तरह सरकार की तरफ से हुई थी। न्यायालय ने कहा कि यह अनुचित और भेदभावपूर्ण है कि सरकार की गलती के कारण सीनियर अधिकारी नुकसान झेलें जबकि उनके जूनियर को पदोन्नति का लाभ मिल जाए। दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण का आदेश बरकरार रखते हुए भारत सरकार की याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों अधिकारियों को उनके जूनियर की पदोन्नति की तिथि 30 जून 2020 से जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड में काल्पनिक पदोन्नति दी जाए। इसके साथ ही उन्हें सभी परिणामी लाभ (जैसे वेतन और वरिष्ठता का लाभ) भी प्रदान किए जाएं। आदेश के पालन के लिए सरकार को आठ सप्ताह का समय दिया गया है। यह निर्णय सरकारी सेवाओं में उन अधिकारियों के लिए राहत का मार्ग खोलता है, जिन्हें प्रशासनिक देरी के कारण नुकसान झेलना पड़ता है। कोर्ट ने साफ कहा है कि कर्मचारियों को उस गलती के लिए दंडित नहीं किया जा सकता जो उनकी नहीं, बल्कि व्यवस्था की है।