
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने बयान जारी कर कहा कि इसरो की उपलब्धि वाकई शानदार-बेमिसाल है। आज हम जो सफलता देख रहे हैं वो एक सामूहिक संकल्प सामूहिक कामकाज है। यह सिस्टम का नतीज़ा है, एक व्यक्ति का नहीं है। उन्होंने कहा कि जब लोग टीम वर्क के साथ सामूहिक मानसिकता के साथ काम करते हैं तो ऐसी सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग शिक्षा के संस्थान और निजी क्षेत्र की छोटी-छोटी कंपनियां हैं, जिन्हें आज स्टार्टअप्स कहते हैं, उनके साथ इसरो की हुए भागीदारी कार्यक्रम का भी असर हम देख रहे हैं। आज का क्षण हमारे लिए बहुत ही गर्व का क्षण है और हम इसरो को सलामी देते हैं। रमेश ने कहा कि 1962 के फरवरी महीने में होमी भाभा और विक्रम साराभाई की दूरदर्शिता के कारण इंडियन नेशनल कमेटी ऑन स्पेस रिसर्च की स्थापना की गई। इसमें शामिल चार-पांच व्यक्तियों में एपीजे अब्दुल कलाम भी थे। उन्होंने कहा कि 1969 के अगस्त में विक्रम साराभाई ने इसरो की स्थापना की। वर्ष 1972 और 1984 के बीच सतीश धवन आए और उन्होंने अद्वितीय नेतृत्व दिखाया। वैज्ञानिक, तकनीकी और मैनेजमेंट के दृष्टिकोण से जो योगदान उनका रहा है, वो बेमिसाल योगदान रहा है। उनके साथ रहे ब्रह्म प्रकाश ने हमारे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम में भी परिवर्तनकारी योगदान दिया है। सतीश धवन के बाद यू आर राव समेत कई चेयरमैन आए। उन सभी ने इसरो के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में अपना विशेष योगदान दिया। गौरतलब है कि इसरो के चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चंद्रमा पर उतर गया है।
Updated on:
23 Aug 2023 06:36 pm
Published on:
23 Aug 2023 06:33 pm
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
