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Congress President Election : कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के बाद गांधी परिवार की भूमिका पर खरगे का बड़ा बयान

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव के बाद गांधी परिवार की कांग्रेस आलाकमान में भूमिका के साथ कांग्रेस संगठन की स्थिति, देश के मौजूदा हालात, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के असर और कई अन्य मुद्दों पर राजस्थान पत्रिका के साथ विशेष बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश-

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कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के बाद गांधी परिवार की भूमिका पर खरगे का बड़ा बयान

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के बाद गांधी परिवार की भूमिका पर खरगे का बड़ा बयान

नई दिल्ली। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए पहली नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के दो नेता मल्लिकार्जुन खरगे व सांसद शशि थरूर मैदान में हैं। लगभग 24 साल बाद कांग्रेस को गैर गांधी परिवार का अध्यक्ष मिलेगा। खरगे ने चुनाव प्रचार की व्यस्तता के बीच कर्नाटक रवाना होने से पहले अपने दिल्ली स्थित निवास 10-राजाजी पार्क में पत्रिका दिल्ली ब्यूरो के सुरेश व्यास व शादाब अहमद से खास बातचीत में मौजूदा राजनीतिक हालात, कांग्रेस संगठन, भावी चुनौतियों और गांधी परिवार की भूमिका को लेकर सवालों के खुलकर जवाब दिए। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल: कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के साथ भारत जोड़ो यात्रा चल रही है। क्या इससे कांग्रेस को फायदा मिलेगा?

जवाब: देखिए, राहुल गांधी मेहनत कर रहे हैं। भाजपा-आरएसएस के लोग उनको अपमानित व बदनाम करते हैं, लेकिन राहुल कभी भी उनसे नहीं डरे। वह स्वच्छ है। उनको डराने व गुस्से में लाने के लिए कुछ भी बोलते रहते हैं। आज भारत जोड़ो यात्रा में लाखों लोग जुड़ रहे हैं। राहुल 3500 किलोमीटर लंबी पदयात्रा कर रहे हैं। वह पैदल जा रहे हैं।

वे हर व्यक्ति और संस्था से मिलकर देश जोड़ने की बात कर रहे हैं। आज हर जगह भाषा, धर्म, जाति के नाम पर नफरत बढ़ रही है। वहीं, ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई का दुरुपयोग हो रहा है। शिक्षण संस्थाओं में सिलेबस बदलकर अपनी विचारधारा थोपने की कोशिश चल रही है। चुनी हुई सरकारों को गिराने की कोशिश की जा रही है। छह राज्यों में हमारी सरकार आई, लेकिन भाजपा ने चोरी से इन सरकारों को गिरा दिया। इसका फायदा हमको होगा, लेकिन देश को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

सवाल: आज यह धारणा बन गई है कि कांग्रेस खत्म हो गई है। चुनाव नतीजों से यह धारणा और स्थापित हो जाती है। इसे तोड़ने के लिए क्या करेंगे?

जवाब: सही बात है, एक दिन या एक महीने में ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, लेकिन हम इसमें बदलाव लाने की कोशिश करेंगे। संगठन को मजबूत बनाने के लिए उदयपुर नव-संकल्प को अमल में लाकर पार्टी को नया ढांचा देंगे। जो-जो लोग उपेक्षित है, उनको शामिल कर हम काम करेंगे। यह तो निश्चित है कि पार्टी चुनाव जब हारती है तो कुछ लोग छूटते जाते हैं, लेकिन जो लोग विचारधारा से जुड़ते हैं, वो पार्टी नहीं छोड़ते हैं।

सबको मालूम है कि कुछ पार्टियां ऐसी है जो कभी हुकूमत में नहीं आई, लेकिन उनकी विचारधारा के लोग उनसे जुड़े रहते हैं, भागकर नहीं जाते हैं। जिनका विचारधारा में विश्वास कम होता है, वह पार्टी से भागते हैं। हर पार्टी में दो तरीके के लोग रहते हैं। जब पार्टी सत्ता में आती है तो उससे कई लोग जुड़ते जाते हैं। जब पार्टी सत्ता से बाहर होती है तो कई लोग डर या अन्य कारणों से पार्टी से भाग जाते हैं। हम विचारधारा से लोगों को जोड़ने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएंगे और प्रचार करेंगे।

सवाल: चुनाव के साथ ही यह धारणा भी चल पड़ी है कि जो भी अध्यक्ष बनेगा वह गांधी परिवार के रिमोट कंट्रोल से चलेगा। इस धारणा को कैसे तोड़ेंगे?

जवाब: देखिए, गांधी परिवार को बार-बार बदनाम कर रहे हैं। जो अच्छे काम और त्याग किया, उन्होंने सुख नहीं भोगा। बहुमत मिलने के बाद दूसरों को प्रधानमंत्री और मंत्री बनाया। इस देश में ऐसे बहुत से लोग है, जिन्हें एक मंत्री पद नहीं मिलता है तो वे पार्टी छोड़कर चले जाते हैं। देश की एकता, अखंडता के लिए अपने परिवार के लोगों की कुर्बानी दी, उनको कोई ऐसा पाठ पढ़ाए ठीक बात नहीं है। वैसे परिवार के लोग कोई दखलदांजी नहीं करते हैं। यदि वह कोई अपनी बात रखेंगे और हम भी अपनी बात रखेंगे। वह तो हमेशा से सभी की बात सुनते रहे हैं।

हम वैसे भी सामूहिक नेतृत्व की बात करते हैं। यदि वह एकतरफा निर्णय लेते तो बहुत से लोगों के साथ संवाद ही नहीं करते। वह बार-बार लोगों को बुलाकर समझाते हैं, बात करके फैसले करते रहे हैं। चंद लोग ऐसे हैं जिन्हें पार्टी के लोकतंत्र का जोश आया है। अरे भई आप अपने क्षेत्र में तो काम कर लो। गांधी परिवार को दोष देना ठीक नहीं है।

सवाल: इस चुनाव में गांधी परिवार निष्पक्ष है। चुनाव के बाद परिवार की क्या भूमिका रहने वाली है?

जवाब: वह पार्टी का अहम हिस्सा है। गांधी परिवार पार्टी का अविभाज्य अंग है। उनके बिना पार्टी को कोई चला भी नहीं सकता, यह तो सत्य है ना। उनकी प्रसिद्धि है, उनका काम, त्याग है। इसके साथ ही उनको अनुभव भी है। 20-20 साल कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर काम किया है। देश के हर कोने में उनको जानते भी है और प्रसिद्ध नेता भी है। यदि आप जननेता की सलाह नहीं सुनेंगे तो फिर किसकी सलाह सुनने वाले हैं। राहुल जी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। प्रियंका गांधी यूपी में लड़ाई लड़ रही है। यदि इनसे सलाह-मशविरा भी नहीं करेंगे तो फिर किससे करेंगे, पार्टी तोड़ने वालों से। यह चीजें हैं, इसको बाद में देखेंगे। फिलहाल संगठन का चुनाव चल रहा है।

सवाल: कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए प्रचार कर रहे हैं। शशि थरूर बार-बार बड़े नेताओं का सहयोग नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। इसको कैसे देखते हैं?

जवाब: मैं सभी डेलीगेट्स के साथ वरिष्ठ नेताओं के प्रस्ताव पर उम्मीदवार बना हूं। यदि वरिष्ठ नेता व डेलीगेट्स मेरे पास आते हैं तो क्या मैं उन्हें अपने पास आने से मना कर दूं। मेरे 55 साल के राजनीतिक जीवन में 50 साल तो विधायक, सांसद, मंत्री, नेता प्रतिपक्ष रहा हूं। ऐसे में यदि आपको 10 फीसदी लोग जानते होंगे तो मुझे भी एक फीसदी लोग तो जानते ही होंगे। हम पार्टी के लिए मेहनत करते आए हैं तो उसे भी तो कुछ लोग सराहते ही होंगे। यदि वह लोग कहीं आए या नहीं आए, इस पर वह भी बता सकते हैं। मैं कांग्रेस डेलीगेट्स का उम्मीदवार बना। मैंने किसी पर दबाव नहीं डाला। वैसे यह परिवार का चुनाव है। आंतरिक मामला है। वो (शशि थरूर) भी मेरा छोटा भाई है। अंतिम तौर पर हमें मोदी-शाह से लड़ना है। महंगाई, बेरोजगारी, डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने, पब्लिक सेक्टर बेचने के खिलाफ हमें एक होकर लड़ना है।

सवाल: कांग्रेस की राजस्थान व छत्तीसगढ़ में सरकार है और दोनों ही जगह आंतरिक कलह के हालात बने हुए हैं। कैसे निपटेंगे?

जवाब: इसको बाद में देख लेंगे। फिलहाल हम इस छोटे से चुनाव लड़ रहे हैं। इसके बाद बड़ी लड़ाई भी देख लेंगे। पार्टी को मजबूत करने के लिए ‘हम’ पर फोकस करेंगे।