
'क्षितिज-2037' रोडमैप को और आगे बढ़ाएगी मैक्रॉन की भारत यात्रा
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत आ रहे फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन की यात्रा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की मजबूती के लिए गत वर्ष 14 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस दौरे के वक्त में निर्धारित 'क्षितिज-2037' रोडमैप को आगे बढ़ाने में अहम साबित होगी।
दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने पर इसे अगले पच्चीस वर्षों तक आगे बढ़ाने के लिए भारत-फ्रांस ने यह रोडमैप तैयार कर नए साझा लक्ष्य तय किए हैं। इसके अनुरूप राष्ट्रपति मैक्रॉन की यात्रा को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
फ्रांस के दूतावास ने बुधवार को राष्ट्रपति के ब्यौरे की जानकारी देते हुए कहा कि पीएम मोदी के साथ राष्ट्रपति मैक्रॉन की बातचीत में आपसी सहयोग आगे बढ़ाने व रोडमैप के तीन स्तंभों के तहत नई पहलों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। ये तीन स्तम्भ सुरक्षा व सम्प्रभुता साझेदारी, जलवायु परिवर्तन व गरीबी उन्मूलन की चुनौतियों से निपटने के लिए पार्टनरशिप फॉर प्लेनेट और आम लोगों व पर्यटकों के जरिए भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित किए गए हैं।
दूतावास ने कहा कि पार्टनरशिप फॉर प्लेनेट 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना के अनुरूप है। इसके तहत मैक्रॉन की यात्रा जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि, गरीबी उन्मूलन व नई प्रौद्योगिकियों के जरिए किए गए परिवर्तनों सहित मौजूदा चुनौतियों से मुकाबले के लिए आम पहल को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी।
लोगों के लिए साझेदारी
दूतावास के अनुसार राष्ट्रपति मैक्रॉन की यात्रा भारतीय छात्रों, कलाकारों, निवेशकों व पर्यटकों के लिए अधिक अवसर पैदा करने की फ्रांस की प्रतिबद्धता पर जोर देगी। राष्ट्रपति मैक्रॉन ने वर्ष 2030 तक तीस हजार भारतीय छात्रों को प्रवेश की घोषणा की थी। यात्रा के दौरान इस पहल पर विशेष बल दिया जाएगा। साथ ही फ्रांस के 'मेक इट' के बैनर तले व्यापारिक संबंधों b परस्पर-निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
तीसरी आधिकारिक भारत यात्रा
मैक्रॉन की हाल के बरसों में यह तीसरी भारत यात्रा है। वे इससे पहले मार्च-2018 में राजकीय यात्रा पर और सितंबर-2023 में दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन में आधिकारिक यात्रा पर आ चुके हैं। अब वे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आ रहे हैं। गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में फ्रांस की यह छठी भागीदारी है, जो किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक है।
Published on:
24 Jan 2024, 7:53 PM IST
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