हालांकि, जस्टिस कर्णन पहले भी विवादों में रह चुके हैं। कम से कम तीन चीफ जस्टिस उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट को लिख चुके हैं। कर्णन देश के पहले जज थे, जिन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग में जातीय भेदभाव की शिकायत की थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि जजों के चयन का तरीका गलत है और अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद इसके विरोध में याचिकाकर्ता बन जाएंगे।