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जज का आरोप, कॉलेजियम में होता है जाति भेदभाव

मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन ने जजों के चयन के कॉलेजियम प्रणाली में जातिगत भेदभाव पर सवाल उठाते हुए तीन पत्र लिखे हैं। सही केस न दिए जाने का का विरोध करते हुए उन्होंने हाई कोर्ट अकाउंट्स के स्पेशल ऑडिट की मांग की है।

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kamlesh sharma

Nov 08, 2015

मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन ने जजों के चयन के कॉलेजियम प्रणाली में जातिगत भेदभाव पर सवाल उठाते हुए तीन पत्र लिखे हैं। सही केस न दिए जाने का का विरोध करते हुए उन्होंने हाई कोर्ट अकाउंट्स के स्पेशल ऑडिट की मांग की है।

उन्होंने कहा कि गैर जरूरी केस दिए जाने के विरोध में वह लंबी छुट्टी पर जा रहे हैं। मद्रास हाई कोर्ट ने लिखा, 'आपके द्वारा किए जा रहे उत्पीडऩ से परेशान होकर मैं भारी दिल के साथ लंबी छुट्टी पर जाने के लिए मजबूर हूं।' उन्होंने चीफ जस्टिस पर आरोप लगाया कि वह उनका लगातार उत्पीडऩ कर रहे हैं। पत्र में कॉलेजियम प्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत उच्च जाति के उम्मीदवारों को ही बढ़ावा दिया जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

पहले भी रहे हैं विवादों में
हालांकि, जस्टिस कर्णन पहले भी विवादों में रह चुके हैं। कम से कम तीन चीफ जस्टिस उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट को लिख चुके हैं। कर्णन देश के पहले जज थे, जिन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग में जातीय भेदभाव की शिकायत की थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि जजों के चयन का तरीका गलत है और अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद इसके विरोध में याचिकाकर्ता बन जाएंगे।

सोशल मीडिया पर वायरल पत्र
उन्होंने तीन पत्र जारी किए, जो जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। उन्होंने एक पत्र केंद्रीय कानून मंत्री को भी भेजा है। इसमें उन्होंने चीफ जस्टिस की शिकायत की है और बताया है कि कोर्ट में उनके साथ किस तरह उत्पीडऩ किया जा रहा है।

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