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नशे के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता, 182 करोड़ की ‘जिहादी ड्रग’ जब्त

अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अभियान के तहत केन्द्रीय एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ऑपरेशन रेजपिल के तहत नशीला पदार्थ कैप्टागन जिसे जेहादी ड्रग भी कहते हैं, कि बड़ी खेप जब्त की है। कार्रवाई में लगभग 182 करोड़ की कीमत का 227.7 किलोग्राम कैप्टागन जब्त किया गया तथा अवैध रूप से भारत में रह रहे एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया। कैप्टागन में मुख्य रूप से फेनेटाइलीन और एम्फेटामाइन पाए जाते हैं, जो एनडीपीएस अधिनियम के तहत मादक पदार्थ हैं। एनसीबी ने पिछले सोमवार को नई दिल्ली के नेब सराय क्षेत्र में एक मकान की तलाशी के दौरान चपाती कटिंग मशीन में छिपाकर रखी 31.5 किलो कैप्टागन टैबलेट बरामद की।

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अभियान के तहत केन्द्रीय एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ऑपरेशन रेजपिल के तहत नशीला पदार्थ कैप्टागन जिसे जेहादी ड्रग भी कहते हैं, कि बड़ी खेप जब्त की है। कार्रवाई में लगभग 182 करोड़ की कीमत का 227.7 किलोग्राम कैप्टागन जब्त किया गया तथा अवैध रूप से भारत में रह रहे एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया। कैप्टागन में मुख्य रूप से फेनेटाइलीन और एम्फेटामाइन पाए जाते हैं, जो एनडीपीएस अधिनियम के तहत मादक पदार्थ हैं।

चपाती कटिंग में छिपा कर रखी थी दवा

एनसीबी ने पिछले सोमवार को नई दिल्ली के नेब सराय क्षेत्र में एक मकान की तलाशी के दौरान चपाती कटिंग मशीन में छिपाकर रखी 31.5 किलो कैप्टागन टैबलेट बरामद की। इसे जेद्दा, सऊदी अरब भेजा जाना था। पर्यटक वीजा पर आया सीरियाई नागरिक वीजा समाप्ति के बाद भी यहीं रह रहा था और उसने नेब सराय में मकान किराये पर लिया था। पूछताछ के आधार पर शनिवार को गुजरात के मुंद्रा में एक कंटेनर से लगभग 196.2 किलोग्राम कैप्टागन पाउडर बरामद किया गया। इसे भेड़ की ऊन से भरा बता कर सीरिया से आयात किया गया था। इस खेप को खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्व देशों में भेजा जाना था। एक विदेशी एजेंसी ने इसका सुराग दिया था। इससे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स के भारत को ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल करने की साजिश का पर्दाफाश हुआ।

अमित शाह ने दोहराई जीरो टॉलरेंस की नीति

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा मध्य-पूर्व जा रहे ड्रग के इस कंसाइनमेंट को पकड़ना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, नशीले पदार्थों के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस नीति के उदाहरण हैं। भारत में आने वाली या हमारे देश को ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल करके बाहर जाने वाली हर ग्राम ड्रग पर हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे।

पहले देती है जोश, फिर गुस्सैल बना देती है दवा

संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय के अनुसार कैप्टागॉन शरीर में ऊर्जा बढ़ाता है, लंबे समय तक जागे रहने में मदद करता है और जोश पैदा करता है। यही वजह है कि इसे लड़ाई और हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। कैप्टागन की लत बहुत जल्दी लगती है और इसके दुष्प्रभाव से गंभीर हृदय संबंधी समस्याएं, नींद नहीं आना और मनोविकृति, मतिभ्रम और अत्यधिक गुस्सैल हो जाने जैसे प्रभाव पड़ते हैं। लगातार प्रयोग से मस्तिष्क का तंत्रिका तंत्र खराब हो जाता है और लीवर व किडनी पर असर पड़ता है।

क्यों कहते हैं इसे जेहादी ड्रग

कैप्टागॉन को 'जिहादी नशा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका इस्तेमाल मिडिल ईस्ट के युद्धग्रस्त इलाकों में आईएसआईएस और हमास जैसे आतंकवादी संगठनों के लड़ाकों की ओर से भारी मात्रा में किया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सऊदी अरब दुनिया में एम्फेटामीन जब्ती के एक-तिहाई से अधिक मामलों का केंद्र है। कतर, कुवैत और यूएई में भी हाल के वर्षों में करोड़ों गोलियों की बड़ी खेप जब्त होने के मामले सामने आए हैं।