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दवाएं बनेगी जल्दी, अनुमति के बजाए केवल सूचना देकर शुरू होगा निर्माण

नियमों में बदलाव: दवा परीक्षण की अर्जी की समीक्षा 90 से घटा 45 दिन की नई दिल्ली। देश में नई दवाओं के विकास और निर्माण में तेजी लाने के लिए केन्द्र ने नई दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल के लिए आवेदनों की समीक्षा का समय आधा करते हुए 90 दिन से घटा कर 45 दिन कर […]

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नियमों में बदलाव: दवा परीक्षण की अर्जी की समीक्षा 90 से घटा 45 दिन की

नई दिल्ली। देश में नई दवाओं के विकास और निर्माण में तेजी लाने के लिए केन्द्र ने नई दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल के लिए आवेदनों की समीक्षा का समय आधा करते हुए 90 दिन से घटा कर 45 दिन कर दिया है। साथ ही दवा बनाने की अनुमति की जगह अब केवल सूचना दे कर निर्माण शुरू किया जा सकेगा। केन्द्र ने इस संबंध में न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स (एनडीसीटी) रूल्स, 2019 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के तहत अब क्लिनिकल ट्रायल के लिए नई दवा की अनुमति मांगने वाले आवेदनों, या बायोअवेलेबिलिटी या बायोइक्विवेलेंस (बीए/बीई) स्टडी करने के आवेदनों पर 45 दिन में निर्णय किया जाएगा। साथ ही हाई रिस्क वाली दवाओं को छोड़कर अन्य दवाओं के निर्माण व ट्रायल के लिए केवल सूचना देने के साथ ही काम शुरू किया जा सकता है। पिछले साल सितंबर में इसका ड्राफ्ट जारी किया गया था इस पर एक महीने में आपत्तियां मांगी गई थी। आपत्तियों पर चर्चा के बाद ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) की सिफारिश से नए नियम अधिसूचित किए गए हैं। नए नियम एक मार्च से लागू होंगे।

क्या है बायोअवेलेबिलिटी या बायोइक्विलेंस

बीए/बीई स्टडी यह साबित करने के लिए की जाती है कि कोई जेनेरिक दवा चिकित्सीय रूप से ब्रांडेड दवा के बराबर है, या कोई नया फॉर्मूलेशन स्टैंडर्ड डोज के मुकाबले बेहतर काम करता है। नए नियमों के अनुसार आवेदकों को अब चुनिंदा हाई रिस्क दवाओं को छोड़कर अन्य की बीए/बीई स्टडी के लिए औपचारिक परीक्षण अनुमति का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।

अब क्या करना होगा

पहले निर्माता को केन्द्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण को आवेदन कर उससे अनुमति लेनी पड़ती थी। उसके बाद ही दवा का निर्माण या आयात संभव हो सकता था। अब यदि नई दवा या अनुसंधान दवा का निर्माण किया जा रहा है एक ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा और आवेदनकर्ता को ऑनलाइन ही एक इंटेंड जारी किया जाएगा। उसके आधार पर निर्माता ऐसी दवाओं का निर्माण कर सकता है।

कदम उचित लेकिन मानक सख्त हों

प्रशासनिक प्रक्रिया के समय को कम किया जाना उचित है। इसे 30 दिन तक भी किया जा सकता है, लेकिन ट्रायल के मानक को सख्त किया जाना चाहिए। इंसानों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। दवा को असरकारक व दाम जनता की पहुंच में होना चाहिए।

-डॉ.नरेन्द्र कुमार शर्मा, पूर्व अध्यक्ष आईएमए, नोएडा

ये होंगे फायदे

  • मरीजों को नई दवाएं जल्दी मिलेंगी
  • कंपनियों को समय और लागत की बचत
  • रिसर्च और नई खोजों को प्रोत्साहन।
  • देश दवा अनुसंधान का बड़ा केंद्र बन सकता है।

ये जोखिम भी

  • कम समय में समीक्षा से मरीजों पर खतरा बढ़ सकता है।
  • गुणवत्ता नियंत्रण चुनौती
  • कंपनियां नियमों का गलत फायदा उठा सकती हैं।
  • नियामक संस्थाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

देश में पंजीकृत कुल क्लीनिकल ट्रायल- 102005