Petrol or Diesel: कौन से फ्यूल वाली कार रहेगी आपकी जेब पर हल्की, ऐसे जानें

  • पेट्रोल और डीजल कार के बीच खरीदारों को रहता है बड़ा कंफ्यूजन।
  • कार की कीमत के साथ ही रनिंग कॉस्ट, फाइनेंस का ध्यान रखना भी जरूरी।
  • मारुति सुजुकी का कैल्कुलेटर है परेशानी में फंसे लोगों के लिए बड़े काम का।

नई दिल्ली। भारत में कार खरीदारों के बीच डीजल और पेट्रोल के दाम में अंतर काफी बड़ी भूमिका निभाता है। शायद इसकी वजह ईंधन की कम कीमत होने का मतलब कार के चलने के दाम यानी रनिंग कॉस्ट कम होना माना जाता है। लेकिन क्या देश में भारत स्टेज छह (BS6) उत्सर्जन मानक लागू होने के बाद से लोगों की यह आम राय बदल गई है? चलिए जानते हैं क्या है इसकी हकीकत:

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अगर गौर करें पिछले कुछ सालों में आए पेट्रोल और डीजल के दाम में अंतर की तो इसमें काफी कमी आई है। जहां वित्तीय वर्ष 2012-13 में पेट्रोल (66) और डीजल (41) के बीच 25 रुपये का अंतर था, 2019-20 वित्तीय वर्ष में यह घटकर करीब एक चौथाई यानी 7 रुपये पहुंच गया है। इस वर्ष पेट्रोल के दाम 73 रुपये जबकि डीजल के 66 रुपये रहे थे।

दोनों ईंधन के दामों के बीच कम होते अंतर के चलते लोगों की प्राथमिकता भी डीजल की बजाए पेट्रोल कारें बनने लगीं। जहां 2012-13 में पेट्रोल कारों की बाजार में हिस्सेदारी 42 फीसदी थी, 2019-20 में यह जबर्दस्त ढंग से बढ़कर 70.5 फीसदी तक पहुंच गई। बीते 8 वर्षों में 28.5 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से यह बात सामने लाती है कि ज्यादातर कार खरीदार अब डीजल कारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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कैसे चुनें सही कार?

पेट्रोल और डीजल कारों के बीच कौन सी कार चुनी जाए, इसका फैसला करने के लिए कार के स्वामित्व की कुल लागत को समझना जरूरी है। इसके अंतर्गत इन चीजों की गणना की जाएगीः

कार की कीमतः यह कार की ऑन-रोड कीमत होती है, जिसे आप चुकाते हैं। इसमें कार की एक्स-शोरूम कीमत के अलावा इंश्योरेंस, रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन, एक्सेसरीज, फास्टटैग समेत अन्य चीजें-सुविधाएं शामिल होती हैं।

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कार की फाइनेंस कीमतः इसके अंतर्गत अगर आप फाइनेंस में कार खरीदते हैं, तो इसमें कार की कुल कीमत के अतिरिक्त लगने वाला ब्याज और लोन की प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क शामिल होते हैं।

रनिंग कॉस्टः यह आपके रोजाना के कार इस्तेमाल के आधार पर तय की जाती है। इसमें ईंधन के दाम और कार की फ्यूल एफिसिएंशी शामिल होती है।

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने एक कैल्कुलेटर पेश किया है, जिसमें इन चीजों का ध्यान रखते हुए ग्राहक को बताया जाता है कि उसके लिए कौन सी कार लेना फायदेमंद रहेगा। यानी पेट्रोल या डीजल। यह कैल्कुलेटर आपको केवल पेट्रोल और डीजल कार खरीदने के बीच के लागत का अंतर ही नहीं बताता है, बल्कि डीजल कार के लिए आपके द्वारा भुगतान की जाने वाली अतिरिक्त लागत को वसूलने में भी कितने किलोमीटर और वक्त लगेगा, की जानकारी देता है।

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ऐसे समझिए पूरी बात

  • दरअसल पेट्रोल और डीजल कार के बीच अंतर केवल उनमें पड़ने वाले ईंधन की कीमत में ही नहीं बल्कि और भी कई चीजों पर निर्भर करता है।
  • सबसे पहले कैल्कुलेटर कार खरीदार की लोकेशन यानी जिला और प्रदेश पूछता है।
  • फिर कार वेरिएंट लिया जाता है। उदाहरण के लिए स्विफ्ट पेट्रोल एलएक्सआई वेरिएंट ले लिया और इसके डीजल के समकक्ष वेरिएंट की कीमत ले ली गई।
  • अब रनिंग कॉस्ट की बात आती है। इसमें कार की फ्यूल एफिसिएंशी के साथ ही पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम और रोजाना चलने वाली दूरी लिखी जाती है।
  • फिर इसमें फाइनेंस की कीमत जोड़ दी जाती है। इसमें ईएमआई (मूल+ब्याज) आपके द्वारा लिए गए लोन पर दिखाया जाता है, जिसमें अवधि और ब्याज भी जुड़ा होता है।
  • अब आपके सामने आ जाता है नतीजा, जो दिखाता है कि दोनों कारों की कीमत और रनिंग कॉस्ट के हिसाब से कौन सी गाड़ी खरीदना मुनाफे का सौदा रहेगा।
  • जैसे स्विफ्ट के मामले में कार खरीदार शुरुआत में ही 1.45 लाख रुपये अतिरिक्त चुकाता है। इस कीमत को रिकवर करने के लिए खरीदार को इस कार को 10 साल 8 महीने से कुछ ज्यादा वक्त तक रोजाना 50 किलोमीटर चलाना पड़ेगा। यानी करीब 1.97 लाख किलोमीटर गाड़ी चलानी जरूरी होगी।

निष्कर्ष

इसलिए अगर आप भी कार खरीदने का मन बना रहे हैं और पेट्रोल-डीजल में कंफ्यूज हैं, तो इस कैल्कुलेटर के जरिये आसानी से अपने लिए फायदे का सौदा चुन सकते हैं।

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अमित कुमार बाजपेयी
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