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पेट्रोल-डीजल के दाम करने के लिए दिल्‍ली हाईकोर्ट में लगी पीआइएल, अदालत ने की स्‍वीकार

पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी को लेकर सोमवार को विपक्षी दलों ने भारत बंद किया था। अब मंगलवार को इसी मामले में अदालत में एक पीआइएल डाली गई है।

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पेट्रोल-डीजल के दाम करने के लिए दिल्‍ली हाईकोर्ट में लगी पीआइएल, अदालत ने की स्‍वीकार

नई दिल्ली : पूरे देश में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम काफी आसमान छू रहा है। इस वजह से किसान समेत आम आदमी तक परेशान है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार कह दिया है कि पेट्रोल-डीजल का दाम कम करना उसके हाथ में नहीं है। इसे लेकर सोमवार को कांग्रेस के नेतृत्‍व में 21 विपक्षी दलों ने भारत बंद भी किया था। अब मंगलवार को इसी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में एक पीआइएल डाली गई है। यह याचिका दिल्‍ली की डिजायनर पूजा महाजन ने दायर की है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में प्रतिदिन होने वाले बदलाव पर रोक लगाई जाए और इसे आवश्‍यक वस्‍तुओं की लिस्‍ट में शामिल किया जाए। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायाधीश वीके राव की बेंच ने इस याचिका को स्‍वीकार कर लिया है और इस पर बुधवार को सुनवाई होगी।

आवश्‍यक वस्‍तुओं में शामिल करने की मांग
याचिका में मांग की गई है कि अदालत केंद्र सरकार को निर्देश दे कि वह पेट्रोलियम पदार्थों को आवश्यक वस्तुओं में शामिल करे और इसकी कीमत इसी के हिसाब से तय करे। पूजा महाजन के वकील ए मैत्री ने अदालत से कहा कि सरकार ने अप्रत्यक्ष तरीके से तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों को खुली छूट दे रखी है कि वह अपनी सुविधा के हिसाब से इनकी कीमत तय करे। उन्‍होंने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत तय करने में सरकार की भी सहमति है, इसका पता इस बात से चलता है कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले 22 दिनों तक ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई थी। स्‍पष्‍ट लगता है कि चुनावों के मद्देनजर ऐसा किया गया था।

अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर तेल की कीमत बढ़ने की बात सही नहीं
याचिका में कहा गया है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने की बात कह कर लोगों को गुमराह करती है। सच तो यह है कि जब कच्चे तेलों की कीमत घटती है तब भी देश में उस अनुपात में पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी नहीं होती। अगर सरकार ने यह मांग स्‍वीकार कर ली तो तेल के दाम आधे हो सकते हैं।