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कार्यकर्ताओं को टिकट और बूथ मैनेजमेंट से बंग विजय की तैयारी

chhattisgarh BJP flags

bjp flags (Photo Source - Patrika)

अभिषेक सिंघल

नई दिल्ली। हाई प्रोफाइल चेहरों के लिए पहचाने जाने वाले पश्चिम बंगाल के चुनाव को जीतने के लिए भाजपा अपनी परंपरागत चुनाव रणनीति पर चल रही है। अब तक घोषित टिकटों में जहां बड़े और ग्लैमरस चेहरों की जगह कार्यकर्ताओं को तरजीह दी है वहीं पार्टी का पूरा ध्यान बूथ प्रबंधन पर है। इसके साथ ही पार्टी घुसपैठ, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी को मुद्दा बना कर तृणमूल कांग्रेस को घेरने में जुटी है।

एंटी इन्कम्बैंसी और टीना फैक्टर से उम्मीद

टीएमसी और ममता बनर्जी के शासन को पन्द्रह साल होने से एंटी इन्कम्बैंसी के बंगाल में एक बड़े फैक्टर के रूप में उभरने की उम्मीद है। इससे निपटने के लिए ही ममता बनर्जी ने टीएमसी के 74 टिकट काट कर नए लोगों को दिए हैं। इससे टीएमसी कैम्प में असंतोष भी उभरा है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां के बहुत मजबूत स्थिति में नहीं होने के कारण बीजेपी को उम्मीद है कि ममता शासन से नाराज मतदाता भाजपा का रुख करेंगे। पार्टी ने पांच हजार किलोमीटर लम्बी परिवर्तन यात्रा के जरिए भी एंटी इन्कम्बैंसी के मुद्दे को उठाया है।

66 हजार बूथों पर बुनी रणनीति

2021 के चुनाव में मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने के बावजूद कई सीटों पर जीत नहीं पाने के पीछे उन सीटों पर बूथ मजबूत नहीं होना पाया गया। उसके बाद से अपनी जीती सीटों और कम मार्जिन से हारी सीटों के साथ ही संभावित जीत वाली सीटों पर पार्टी ने बूथ नेटवर्क पर ध्यान दिया है और कुल 80 हजार से ज्यादा बूथों में से 66 हजार बूथों पर पार्टी ने अपना मजबूत नेटवर्क खड़ा किया है। पार्टी ने 210 सीटों को ए श्रेणी में और 39 सीटों को बी श्रेणी में रखा है। पार्टी को मतुआ बहुल 50 सीटों से भी विशेष उम्मीद है।

चुनावी हिंसा की घटनाएं हैं बड़ी चिंता

भाजपा के लिए पिछले विधानसभा, पंचायत और लोकसभा चुनाव में हुई हिंसा की घटनाएं एक बड़ी चुनौती हैं। भाजपा काडर में पिछली घटनाओं के कारण कोई भय की स्थिति नहीं बने इसके लिए विशेष तौर पर प्रयास किए जा रहे हैं और पिछले डाटा के आधार पर चुनावी हिंसा की घटनाओं से बचने के लिए विशेष रणनीति भी बनाई जा रही है।

कोलकाता का तोड़ अधिकारी

हुगली, कोलकाता, हावड़ा, उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जो भाजपा के लिए पहेली बना हुआ है। कोलकाता प्रेसीडेंसी के इस क्षेत्र में 2021 में टीएमसी ने 98 सीटें जीती थीं। इस बार यहां भबानीपुर में ममता बनर्जी के सामने सुवेंदू अधिकारी को उतार कर बनर्जी को घेरने की तैयारी की गई है। इससे पूरे कोलकाता क्षेत्र में संदेश देने की कोशिश भी की गई है।

हुमायूं कबीर की पार्टी से बदलेगी चुनावी चौसर

टीएमसी से निष्कासित हुमायूं कबीर की नई बनी पार्टी ने बंगाल के चुनाव में 182 प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है। वहीं कबीर भबानीपुर में ममता बनर्जी के सामने भी प्रत्याशी उतारेंगे। कबीर के साथ आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लीमीन भी प्रत्याशी उतारेगी। यदि कबीर की पार्टी कुछ प्रतिशत मत हासिल करती है तो परिणाम पर असर डाल सकती है।

ऐसे बढ़ा भाजपा का वोट

भाजपा को 2011 के विधानसभा चुनाव में महज 4 प्रतिशत वोट मिले थे। 2016 में 10.17 प्रतिशत वोट और 2019 के लोकसभा चुनाव में 40.25 प्रतिशत वोट मिले। 2021 के विधानसभा चुनाव में 38 प्रतिशत के करीब वोट तो 2024 के लोकसभा चुनाव में 39 प्रतिशत के करीब वोट मिले। पार्टी को इस बार छह प्रतिशत वोट स्विंग की तलाश है। गौरतलब है कि एसआईआर में 61 लाख वोट कटने के बाद कई विधानसभाओं का गणित बदल गया है।

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