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नियम तो नियम है! 0.004% अल्कोहल मिलने पर पायलट सस्पेंड, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी नहीं दी राहत

Delhi High Court pilot suspension: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक पायलट के लाइसेंस को तीन महीने के लिए निलंबित करने के फैसले को सही ठहराया है। अपने फैसले से अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसे मामलों में सख्त नियमों का पालन जरूरी है।

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शराब जांच में पॉजिटिव मिला पायलट (Photo: FB/File)

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में उड़ान से पहले शराब जांच में पॉजिटिव पाए गए पायलट के लाइसेंस निलंबन को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ कहा कि एयरपोर्ट पर किए गए ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट के बाद की गई अन्य जांच इस मामले में प्रासंगिक नहीं मानी जाएगी।

पायलट ने अपने बचाव में तर्क दिया था कि उसने शराब का सेवन नहीं किया था और निजी प्रयोगशालाओं में कराए गए बाद के रक्त और यूरिन टेस्ट के परिणाम 'नेगेटिव' आए थे। पायलट ने यह भी दावा किया कि ब्रेथ एनालाइजर उपकरण त्रुटिपूर्ण हो सकते हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2017 का है, जब एक पायलट को कोलकाता से दिल्ली की फ्लाइट ऑपरेट करनी थी। उड़ान से पहले अनिवार्य ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में उसके खून में 0.004 प्रतिशत अल्कोहल पाया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट के अनुसार, दो बार टेस्ट करने पर भी वही परिणाम सामने आया। इसके बाद एयरलाइन ने नियमों के तहत पायलट को ड्यूटी से हटाते हुए उसका लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया।

कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने स्पष्ट किया कि सिंगल जज के फैसले में कोई त्रुटि नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट एयरपोर्ट पर तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है, इसलिए उसके बाद की जांच को आधार नहीं बनाया जा सकता।

हालांकि सुनवाई के दौरान पायलट के वकील ने तर्क दिया कि गलत पॉजिटिव की स्थिति में यूरिन और ब्लड टेस्ट कराए जाने चाहिए, क्योंकि मेडिकल मानकों के अनुसार शराब के अंश शरीर में कुछ दिनों तक रह सकते हैं।

हालांकि, हाई कोर्ट ने इस पर कहा कि ऐसे तकनीकी पहलुओं पर निर्णय लेना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और यह संबंधित प्राधिकरणों पर निर्भर करता है कि वे भविष्य में ऐसी प्रक्रिया लागू करें या नहीं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी पायलट को गलत पॉजिटिव का सामना करना पड़ता है, तो भविष्य में मौके पर अतिरिक्त जांच की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।

पायलट के तर्कों को कोर्ट ने नहीं माना

पायलट ने दावा किया था कि उसने शराब का सेवन नहीं किया था और निजी लैब में कराए गए ब्लड और यूरिन टेस्ट में रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। साथ ही उसने ब्रेथ एनालाइजर मशीन की सटीकता पर भी सवाल उठाए थे।

लेकिन कोर्ट ने माना कि इन दलीलों के आधार पर पहले से तय प्रक्रियाओं को गलत नहीं ठहराया जा सकता। सिंगल जज द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद पायलट ने डिवीजन बेंच का रुख किया था, जिसे भी अब खारिज कर दिया गया है।

अदालत ने सिंगल जज के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि एयरपोर्ट पर किए गए परीक्षण के बाद किसी भी अन्य टेस्ट का परिणाम मायने नहीं रखता।

दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को विमानन सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह फैसला एयरलाइंस और पायलट्स दोनों के लिए स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।