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एस्ट्रोनॉट बनना चाहती हैं रफाल की पहली महिला पायलट

हौसलों की उड़ान : भारत के अंतरिक्ष मानव मिशन का हिस्सा बनने का सपना
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नई दिल्ली

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ANUJ SHARMA

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Updated: 7 May 2025, 12:38 AM IST

नई दिल्ली. रफाल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली भारतीय वायुसेना की पहली महिला पायलट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह अब अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना देख रही हैं। भारत अंतरिक्ष में मानव मिशन की योजना बना रहा है। शिवांगी का कहना है, ‘यह मेरी अगली चुनौती होगी। मैंने एक ऐसे क्षेत्र में सफलता हासिल की, जो लंबे समय तक पुरुषों के लिए आरक्षित रहा। अगर मैं सफल हुई हूं तो दूसरी महिलाएं भी यह काम कर सकती हैं।’वाराणसी में जन्मी 29 साल की शिवांगी ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, मेरी जैसी कई महिलाएं फाइटर पायलट बन चुकी हैं। यह न सिर्फ हमारे समाज का आधुनिकीकरण दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि महिलाएं अब अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं। उम्मीद है कि अंतरिक्ष यात्री बनने का मेरा सपना भी पूरा होगा। शिवांगी के पति भी फाइटर पायलट हैं। शिवांगी ने कहा, मेरी मां प्रेरणा का बड़ा स्रोत थीं। वह सिर्फ यह नहीं चाहती थीं कि मैं शिक्षित बनूं, वह चाहती थीं कि मैं आत्मनिर्भर बनूं। उन्होंने सभी कोशिशों में मेरा साथ दिया। कड़ी चुनाव प्रक्रिया के बाद 2020 में शिवांगी को फ्रांसीसी प्रशिक्षकों के साथ सिम्युलेटर ट्रेनिंग के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। उसके बाद उन्हें रफाल उड़ाने का मौका मिला। वह कहती हैं, इसकी रेस्पॉन्सिवनेस प्रभावशाली है, कॉकपिट बहुत आरामदायक है।

देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए...

कई साल पहले शिवांगी पहली बार नई दिल्ली के वायुसेना संग्रहालय गई थीं। तब छोटी बच्ची थीं। उसी संग्रहालय में समय को याद करते हुए उन्होंने कहा, यहीं से मेरे रोमांच की शुरुआत हुई। यहां विमानों को देखकर मेरा मुंह खुला रह गया था। तभी फैसला कर लिया था कि पायलट बनना है। पहली बार कॉकपिट में बैठी तो नर्वस और चिंतित थी, लेकिन अकेले उड़ान भरने का लम्हा बेहद रोमांचक था।

नियंत्रण में कौशल की जरूरत

शिवांगी ने बताया कि जब वह पहली बार मिग-21 लड़ाकू विमान में बैठीं तो एहसास हुआ कि लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए नियंत्रण पाने में कितने कौशल की जरूरत होती है। भारतीय वायुसेना में महिलाओं की भर्ती 1995 में शुरू हुई थी, लेकिन उन्हें फाइटर पायलट बनने की इजाजत 2015 में मिली। इस समय वायुसेना में 1,600 से ज्यादा महिला अधिकारी हैं। इनमें कई फाइटर पायलट हैं।

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