
अल्फोंसो सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी बेहद लोकप्रिय है।
History of Hapus Mangoes: भारत में गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में हर तरफ फलों के राजा आम का राज हो जाता है। सोशल मीडिया से लेकर हर घर की रसोई तक आम की नई-नई रेसिपी छाने लगती हैं। वैसे तो देश में आम की सैकड़ों किस्में मिलती हैं, लेकिन महाराष्ट्र के रत्नागिरी का अल्फोंसो, जिसे स्थानीय भाषा में हापुस कहा जाता है, स्वाद और खुशबू के मामले में सबसे अव्वल माना जाता है। अपनी खास मिठास और मलाईदार बनावट की वजह से इसे पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।
रत्नागिरी के अल्फोंसो आम का इतिहास करीब 500 साल पुराना है। 16वीं सदी में जब पुर्तगाली भारत के पश्चिमी तट पर आए, तो वे अपने साथ पौधों को जोड़ने कलम लगाने की आधुनिक तकनीक लेकर आए थे। इस खास आम का नाम एक मशहूर पुर्तगाली सैन्य कमांडर 'अल्फोंसो डी अल्बुकर्क' के नाम पर रखा गया था। कोंकण के स्थानीय किसानों ने पीढ़ियों से इस तकनीक को सहेज कर रखा, जिससे आज हमें यह बेहतरीन फल मिल रहा है।
अल्फोंसो सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी बेहद लोकप्रिय है। भारत हर साल भारी मात्रा में इसे संयुक्त अरब अमीरात, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में एक्सपोर्ट करता है। राहत की बात यह है कि हाल के सालों में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देशों ने भी इस आम के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं।
अल्फोंसो आम देश के दूसरे हिस्सों में भी उगाया जाता है, लेकिन जो बात रत्नागिरी के आम में है, वो कहीं और नहीं मिलती।
अनोखा मौसम और मिट्टी
रत्नागिरी अरब सागर के पास है। यहां की नमकीन समुद्री हवा, भारी बारिश और आयरन से भरपूर लैटेराइट मिट्टी का मेल इस फल को एक अनोखी मिठास और लाजवाब खुशबू देता है।
केमिकल फ्री पकाने का तरीका
असली रत्नागिरी हापुस को पकाने के लिए किसी हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसे घास-फूस, चावल के भूसे या लकड़ी के बुरादे में दबाकर प्राकृतिक रूप से पकाया जाता है, जिससे इसका असली स्वाद बाहर आता है।
पहचान और बनावट
यह आम मध्यम आकार का और थोड़ा अंडाकार होता है, जिसके नीचे एक छोटी सी चोंच जैसी नोक होती है। पकने पर इसका छिलका सुनहरे पीले रंग का हो जाता है जिस पर हल्की लालिमा होती है। इसका गूदा बिना रेशे का और पूरी तरह मलाईदार होता है।
Updated on:
20 May 2026, 4:14 PM IST
Published on:
20 May 2026, 4:14 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.