
रनवीर बिट्टू को दोहरी भूमिका में रखने का है बीजेपी का प्लान
BJP Strategy on Punjab Election 2027: पंजाब को अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव से गुजरना है। भाजपा अगले साल होने वाले चुनाव के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है, वो अब पंजाब पर फतह करना चाहती है। ऐसे में पार्टी इस चुनाव के लिए रवनीत सिंह 'बिट्टू' को बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है, जो फिलहाल मोदी सरकार में रेल राज्य मंत्री हैं। उल्लेखनीय है कि बिट्टू ने खुद पंजाब की राजनीति में वापसी की इच्छा जताई थी और भाजपा आलाकमान ने उन्हें राज्य सभा के लिए दोबारा न चुनकर एक तरह से सहमति दे दी है।
रवनीत बिट्टू के लिए भाजपा ने कुछ बड़ा सोच रखा है। 21 जून को मोदी सरकार के दो मंत्रियों- रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का राज्य सभा का कार्यकाल समाप्त हो गया। ऐसे में जॉर्ज कुरियन से इस्तीफा ले लिया गया, जबकि बिट्टू अभी भी राज्यमंत्री बने हुए हैं। यानी मोदी सरकार को बिट्टू से मंत्री पद लेने की कोई जल्दबाजी नहीं है। भाजपा फिलहाल यह चाहती है कि लुधियाना के तीन बार के सांसद रह चुके बिट्टू बतौर मंत्री पंजाब से जुड़े मुद्दों पर काम करते रहें और स्टेट पॉलिटिक्स को भी धार दें। सीधे शब्दों में कहें तो पार्टी बिट्टू को दोहरी भूमिका में देखना चाहती है और इसमें संवैधानिक नियम भी आड़े नहीं आता। नियमों के अनुसार, कोई भी मंत्री संसद के किसी भी सदन का सदस्य बने बिना अधिकतम छह महीने तक पद पर रह सकता है।
माना जा रहा है कि बिट्टू कुछ और महीने मंत्री पद संभालते रहेंगे और फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उन्हें पंजाब में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बिट्टू ने दिल्ली में काफी समय बिता लिया है और अब वह वापस पंजाब जाना चाहते हैं। 3 जून को चंडीगढ़ में पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के कार्यभार संभालने के मौके पर बिट्टू ने खुद राज्य की राजनीति में लौटने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था- दिल्ली में 17 साल हो गए हैं। मैं लोक सभा या राज्य सभा का सदस्य रहा हूं। अब मेरा मन कर रहा है कि विधानसभा आकर पंजाब के लिए काम करूं। बिट्टू ने आगे पार्टी नेताओं से कहा कि हमें काम सौंपें, हमारा बोरिया-बिस्तर बांधकर पंजाब भेज दें।
इसके ठीक बाद यानी 4 जून को बिट्टू का नाम राज्य सभा चुनाव के लिए BJP की 11 उम्मीदवारों की लिस्ट में नहीं आया। उनके बजाए पार्टी ने पंजाब BJP नेता और राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाया। चुग 11 जून को निर्विरोध चुन लिए गए। इससे यह साफ होता है कि भाजपा आलाकमान भी बिट्टू को पंजाब भेजने के लिए तैयार है। पंजाब भाजपा के कई नेताओं का मानना है कि पार्टी बिट्टू के लिए दोहरी भूमिका तैयार कर रही है।
बिट्टू सोशल मीडिया पर रेल मंत्रालय के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स जैसे फ्रेट कॉरिडोर, स्टेशन रीडेवलपमेंट वर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को हाईलाइट करते रहते हैं, साथ ही 'पंजाब ऑलवेज!' टैगलाइन के तहत राज्य से जुड़े मुद्दों को भी उठाते हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते बिट्टू 22 जून, 2024 को राजस्थान से उपचुनाव के ज़रिए राज्य सभा में आए और उन्हें मोदी सरकार में रेल राज्यमंत्री बनाया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2024 लोकसभा चुनावी अभियान के दौरान लुधियाना में यह ऐलान किया था कि अगर BJP की अगुवाई वाली NDA सत्ता में वापस आती है तो बिट्टू को मंत्री बनाया जाएगा। यह भाजपा द्वारा फेंका गया सिख कार्ड था, जो काम कर गया। अब पार्टी उसी रणनीति के सहारे पंजाब में भी सत्ता हासिल करना चाहती है। बिट्टू को केंद्रीय मंत्रालय में मंत्री बनाए रखकर और तरुण चुग को राज्य सभा भेजकर, पार्टी ने यह दर्शाने का प्रयास किया है कि उसने पंजाब से सिख और हिन्दू दोनों समुदायों को प्रतिनिधत्व दिया है।
रवनीत बिट्टू उन नेताओं में शुमार हैं, जो कांग्रेस से भाजपा में गए। मार्च 2024 में उन्होंने ‘हाथ’ छोड़कर ‘कमल’ थाम लिया। कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका था। राहुल गांधी ने उन्हें 'गद्दार' कहा था, और लुधियाना लोक सभा सीट पर चुनावी कैम्पेन में भी कांग्रेस उन्हें गद्दार कहती रही। शायद ‘गद्दार’ का लेबल लोक सभा चुनाव में बिट्टू की हार का कारण बना। वह पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से 20,000 से ज्यादा वोटों से हार गए। हालांकि, इस हार के बावजूद BJP नेताओं ने बिट्टू की पीठ थपथपाई।
एक BJP नेता ने कहा - बिट्टू भले ही लोक सभा चुनाव हार गए, लेकिन उनके बारे में नेगेटिव कैंपेन के बावजूद BJP नौ में से छह सीटों पर टॉप पर रही। हालांकि, दाखा, गिल और जगराओं जैसे क्षेत्रों में पीछे रह गई, क्योंकि उस समय किसानों के विरोध के कारण गांवों में पूरी तरह से कैंपेन नहीं किया जा सका।
बिट्टू 2014 और 2019 में लुधियाना लोक सभा सीट से जीते थे और 2024 में भी वहीं से चुनाव लड़े थे, इसलिए माना जा रहा है भाजपा उन्हीं इसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा सकती है। रवनीत बिट्टू पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वह जनता से मेल-मिलाप नहीं करते। हालांकि, समर्थकों का कहना है कि वोटरों से जुड़ने का उनका पर्सनल तरीका है। उन्होंने पंजाब के रेलवे स्टेशनों का बार-बार दौरा करके विकास का नैरेटिव बनाने की भी कोशिश की है।
इस बीच, बिट्टू बुधवार को पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सामने पेश हुए। उन पर 26 मई को धुरी में एक झगड़े के दौरान पुलिसवालों के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी करने का आरोप है। आयोग ने उनकी माफी स्वीकार कर ली है, लेकिन उनके लिए धार्मिक सजा का ऐलान किया है। इसके तहत, उन्हें अमृतसर में हरमंदर साहिब और वाल्मीकि राम तीर्थ मंदिर, फिल्लौर के डेरा ब्रह्मांड और जालंधर के डेरा सचखंड बल्लान में मत्था टेकने और सेवा करने के लिए कहा गया है।
Updated on:
25 Jun 2026 02:39 pm
Published on:
25 Jun 2026 02:13 pm
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