
नई दिल्ली: दूरसंचार कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आर कॉम) और एयरसेल ने मोबाइल कारोबार के विलय को लेकर किए गए समझौते को रद्द कर दिया है। रिलायंस कम्युनिकेशंस ने रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि ‘आरकॉम और एयरसेल के मोबाइल कारोबार का विलय आपसी सहमति से रद्द हो गया है। दोनों दूरसंचार कंपनियों ने आर कॉम के मोबाइल कारोबार का एयरसेल के साथ विलय को लेकर सितंबर, 2016 में समझौता किया था।
उद्योगपति अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी ने कहा कि कानूनी और नियामकीय अनिश्चितताएं और निहित स्वार्थ के तहत हस्तक्षेप से प्रस्तावित सौदे के लिए जरूरी मंजूरी प्राप्त करने में काफी देरी हुई। कंपनी के अनुसार, ‘भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में काफी प्रतिस्पर्धा के साथ ताजा नीति संबंधी दिशा-निर्देश से क्षेत्र के लिये बैंक वित्त पोषण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। उक्त कारणों से विलय समझौता रद्द हो गया है। निदेशक मंडल ने विलय रद्द करने की मंजूरी दे दी है। आर काम इस सौदे के बाद कर्ज में कमी आने की उम्मीद कर रहा था। कंपनी के निदेशक मंडल की रविवार को हुई बैठक में रूपांतरण कार्यक्रम की समीक्षा की गई और कर्ज में कमी लाने को लेकर वैकल्पिक योजना पर विचार किया गया।
कंपनी पर कुल 42,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और इसका स्पेक्ट्रम पोर्टफोलियो की कुल कीमत 19,000 करोड़ रुपये है। एयरसेल पर भी करीब 20,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।रिलायंस ने 14 सितंबर 2016 को अपने वायरलेस कारोबार की एयरसेल में विलय की घोषणा की थी। इस विलय के बाद वह देश की चौथी सबसे बड़ी दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनी बन जाती। नई कंपनी की सम्पत्तियां 65,000 करोड़ रपये से अधिक की और नेट वर्थ 35,000 करोड़ रुपये की होती।
आर कॉम ने कहा कि वह अपने मोबाइल कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए वैकल्पिक योजना पर काम कर रही है। वो 4जी प्रौद्योगिकी पर ध्यान दे रही है। रिलायंस कम्युनिकेशंस को बैंकों ने कर्ज बाध्यताओं को पूरा करने के लिए दिसंबर, 2017 तक का समय दिया है।
Updated on:
02 Oct 2017 12:35 am
Published on:
02 Oct 2017 12:28 am
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
