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सिर्फ त्वचा छूकर रोबोट महसूस करेगा इंसान की भावनाएं

रोबोटिक्स में छलांग : टोक्यो मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के शोध में दावा

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टोक्यो. भविष्य में कृत्रिम बौद्धिकता (एआइ) से लैस रोबोट सिर्फ त्वचा छूकर इंसान की भावनाओं को समझ जाएंगे। जापान के वैज्ञानिकों के नए शोध में यह दावा किया गया। शोध में त्वचा के चालकत्व (स्किन कंडक्टेंस) का इस्तेमाल कर विभिन्न भावनाओं के पैटर्न की पहचान की गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि रोबोट्स के लिए यह तकनीक पारंपरिक भावना विश्लेषण विधियों के मुकाबले ज्यादा सटीक हो सकती है।लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक टोक्यो मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इंसान की विभिन्न मनोदशा का पता लगाने के लिए त्वचा के चालकत्व का इस्तेमाल किया। चालकत्व का मतलब है कि त्वचा ऊर्जा के प्रवाह को कितनी कुशलता से संचारित करती है। यह चालकत्व पसीना बहने और तंत्रिका गतिविधि के कारण बदलता रहता है। इससे मानव मन की विभिन्न अवस्थाओं का पता चलता है। इन अवस्थाओं का डेटा एआइ के जरिए रोबोट में फीड करने से वह इन्हें समझने में सक्षम होगा।

वास्तविक समय में जज्बात पकडऩे में सक्षम

शोधकर्ताओं का कहना है कि चेहरे की पहचान और वाणी विश्लेषण जैसी पारंपरिक भावना विश्लेषण तकनीक अक्सर गलत परिणाम दे सकती हैं। त्वचा का चालकत्व अच्छा विकल्प हो सकता है, जो वास्तविक समय में भावनाओं को पकडऩे में सक्षम है। शोध में 33 प्रतिभागियों को अलग-अलग वीडियो (खुशी, दुख, भय आदि के) दिखाकर उनकी भावनाओं में बदलाव का डेटा तैयार किया गया।

मानव-मशीन इंटरफेस के लिए नए रास्ते

यह शोध रोबोटिक्स के क्षेत्र में बड़ी छलांग के साथ इंसान की भावनाओं को समझने की दिशा में नया कदम भी है। यह चिकित्सा, तकनीकी सहायता और मानव-मशीन इंटरफेस के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि त्वचा के चालकत्व के बारे में समझ बढऩे से रोबोट्स का इंसानों के साथ भावनात्मक संवाद का तरीका और परिष्कृत हो जाएगा।