
पानी के निजीकरण पर सावधान किया संघ के शीर्ष नेता दत्तात्रेय होसबोले ने
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि जल की रक्षा करना लोगों का कर्तव्य है वहीं सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे सभी को जल उपलब्ध करवाएं। इसी तरह विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि सरकार पानी की न्यासी है। इसका निजीकरण नहीं किया जा सकता।
होसबोले ने यह बातें ‘वाटर एन एलिमेंट ऑफ लाइफ’ (Water- an element of life) पुस्तक के विमोचन पर कही। उन्होंने कहा कि जल के बिना जीवन नहीं है। जल स्वयं में एक शक्ति है। सभ्यताओं का विकास भी नदी के तटों पर ही हुआ है। जल कूटनीतिक अस्त्र भी है। जल की रक्षा करना अपना कर्तव्य भी है ओर जीवन का अविभाज्य अंग भी है। उन्होने कहा की जब पुस्तक का निष्कर्ष है कि कीमत से संरक्षण को बढावा नहीं मिलेगा तो यह महत्वपुर्ण विषय है।
पानी का निजीकरण ठीक नहीः आलोक कुमार
विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि पानी पर अधिकार संविधान ने दिया है। यह जीवन के अधिकार के तहत स्वतः ही आता है। पानी मौलिक अधिकार है। पानी का निजिकरण स्वीकार्य नहीं है। सरकार पानी की न्यासी है। सबको पानी मिले यह उनका अधिकार है। सरकार को इसकी व्यवस्था करनी चाहिये।
बाजार की वस्तु नहीं पानीः रामबहादुर राय
इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फार आर्ट के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा कि यमुना को जीवित करना चाहिये। बात पर्यावरण की नहीं अपितु पंच तत्व जिसमें पृथ्वी, आकाश, जल, वायु एवं अग्नि की होनी चाहिये। अमेरिका के बाजार में पानी को वस्तु मानकर व्यापार करना प्रारम्भ कर दिया है यदि ऐसा भारत में हुआ तो यह हमारी संस्कृति पर कुठाराघात होगा। पुस्तक के लेखन में इस पर स्पष्ट विचार रखें गये है।
कीमत लगा कर मांग कम नहीं होतीः राम सिंह
दिल्ली स्कूल आँफ इकोनोमिक्स के प्रोफेसर राम सिंह ने कहा की किताब में सर्वें और डाटा के अनुसार लेखकों का निष्कर्ष है कि पानी की कीमत के आधार पर मांग कम नहीं हो सकती। पानी की कीमत होगी तो गरीब व्यक्ति को पानी मिलना मुश्किल हो जायेगा।
पुस्तक में जल व्यवस्था पर अहम सुझाव
गोपाल कुष्ण अग्रवाल और युथिका अग्रवाल पुस्तक के लेखक हैं। युथिका अग्रवाल ने कहा कि पानी की उपलब्धता पर हमें क्या समस्याऐं आती है और उनका क्या समाधान है, इस पर पुस्तक में विस्तार से चर्चा की गई है। उन्होंने बताया कि दिल्ली को शहरी जल व्यवस्था का मापदण्ड मानकर 277 परिवारों से सीधे सम्पर्क करके अनेक सवालो के द्वारा सर्वे किया गया। इसमें पाया गया कि जल जैसे जीवनदायी तत्व पर पीने के पानी की कीमत नहीं वसूलनी चाहिये और कीमत से यह तत्व गरीबों की पहुँच से बाहर हो जाता है। पुस्तक में शहरी जल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के विस्तृत सुझाव दिये गये हैं।
16 राज्यों में सक्रिय जलाधिकार फाउंडेशन
कार्यक्रम के संचालन में कैलाश गोदुका ने जलाधिकार संस्थान के व्यापक स्वरुप का परिचय कराया और कहा कि विश्व के नौ देशो में सयोंजक तय हो गये है तथा भारत के 16 प्रदेशों में कार्य प्रारम्भ हो गया है। पुस्तक का प्रकाशन ब्लुमसबेरी ने किया है। जलाधिकार फाउंडेशन जल के संरक्षण और संवर्धन हेतु वर्ष 2012 से अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से कार्यरत है।
पुस्तक में उठाए गए प्रमुख प्रश्न-
जल के संरक्षण में उसकी कीमत का कितना योगदान है?
क्या पानी के दाम वसूलने से लोग जल की बरबादी से बचेंगें?
क्या जल की उपलब्धता विशेषकर ऐसे वर्ग जो गरीब हों या उसकी कीमत नहीं चुका सकते, उन के लिए कैसे सुनिश्चित की जाए?
जल का मालिकाना हक किसका है?
क्या सरकार इसका निजिकरण कर सकती है?
Published on:
24 Jun 2021 08:55 pm
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