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Saket Building Accident: मलबे के नीचे सुन्न पड़ रहे थे पैर, थम रही थीं सांसें, पर टूटी मेज के सहारे एक-दूसरे को हिम्मत देते रहे दो यार

Saket Building Accident: साकेत बिल्डिंग हादसे के मलबे में फंसे दो दोस्तों की आंखे नम कर देने वाली कहानी सामने आई है। जिनके मलबे के नीचे दम घुट रहा था और पैर सुन्न हो चुके थे, फिर भी अंधेरे में दोनों दोस्त एक-दूसरे को हिम्मत देते रहे। जब रेस्क्यू टीम आई तो खुद मलबे में फंसे विशाल ने सिर्फ एक बात ही कही- मुझे छोड़ो, पहले मेरे दोस्त को बचाओ।

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Vishal Anuj Friendship, Saket Rescue Operation

photo ani

Delhi Saket Building Accident: दिल्ली के साकेत में जो दर्दनाक बिल्डिंग हादसा हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया है। पल भर में कोचिंग और पीजी मलबे के ढेर में बदल गए अब तक इस हादसे में 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस दर्दनाक हादसे के बीच जहां एक तरफ चीख-पुकार मची थी, वहीं दूसरी तरफ इंसानियत और अपनों को बचाने के कई दिल छू लेने वाले किस्से भी सामने आ रहे हैं। पहले एक पीजी वाली आंटी की कहानी सामने आई थी, जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना वहां रहने वाले कई बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन खुद मलबे की चपेट में आ गई। अब इसी मलबे के नीचे से दो दोस्तों की एक ऐसी दास्तां सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं।

टूटी हुई मेज बनी दोनों का साहारा

बिल्डिंग गिरने के बाद चारों तरफ अंधेरा, चीख-पुकार की आवाजें सुनाई दे रही थी। वहीं दूसरी तरफ मलबे में दबे दो दोस्तों के लिए टूटी हुई एक मेज दोनों यारों का सहारा बन गई। दम घुटने और हाथ-पैर सुन्न होने के बावजूद दोनों दोस्त लगातार एक-दूसरे से बात करते रहे ताकि किसी भी हाल में दोनों की हिम्मत न टूटे और कोई सोने न पाए। आंखे नम कर देने वाली बात तो ये है कि जब रेस्कयू टीम मौके पर पंहुची, तो खुद मलबे में बूरी तरह फंसे होने के बावजूद 24 साल के इंजीनियर और IES एस्पिरेंट विशाल ने अपनी जान से पहले दोस्ती का फर्ज निभाया और रोते हुए कहा- मुझे छोड़ो, पहले मेरे दोस्त अनुज को बचाओ…।

'वो मंजर बहुत बुरा था'

जानकारी के मुताबिक, रेस्क्यू टीम ने दोनों को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया इसके बाद जब विशाल होश में आया तो टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उसने उस खौफनाक मंजर की पूरी कहानी सुनाई। विशाल ने बताया कि जब हम लोग खाना खा रहे थे और अचानक बिल्डिंग गिरी, तो उसके बाद के तीन घंटे दम घुटने, दर्द और डर में कैसे बीते इसको बता पाना भी मुश्किल है। वो मंजर बहुत बुरा था। विशाल ने कहा कि मुझे मलबे के नीचे से लोगों के चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं, लेकिन मुझे नहीं पता था कि बाहर मेरी आवाज किसी को सुनाई दे रही है या नहीं।

'किसे पता था ये आखिरी साथ होगा'

विशाल पास में ही कोचिंग करते हैं और पड़ोस के एक पीजी में रहते हैं। उस शाम वो अपने दोस्तों के साथ मेस में खाना खाने गए थे, पर किसे पता था कि यह उनका आखिरी साथ होगा। शाम के करीब 7:30 बजे जब वो लोग निकलने वाले थे, तभी मेस वाली पार्वती आंटी अंदर भागते हुए आईं और चिल्लाईं कि बिल्डिंग गिर रही है। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, कुछ ही देर में पूरी बिल्डिंग ढह गई। इस हादसे में विशाल के दो दोस्त, कपिल और नलिन नहीं रहे, जबकि आशुतोष बच गया। विशाल, आदित्य और अनुज गंभीर रूप से घायल हो गए। विशाल को बस इतना याद है कि वो बेहोश हो गए थे और जब आंख खुली तो चारों तरफ घुप्प अंधेरा था और वो मलबे के नीचे दबे हुए थे।

'पैर और सीना पूरी तरह दबा हुआ था'

मलबे के नीचे एक टूटी मेज ने विशाल के ऊपरी हिस्से को तो बचा लिया था, लेकिन भारी खंभों ने उनके पैरों और सीने को दबा दिया था जिसकी वजह से वो हिल भी नहीं पा रहे थे। वहीं पास में उनका दोस्त अनुज भी फंसा हुआ था। दोनों का दम घुट रहा था और शरीर सुन्न हो चुका था, फिर भी दोनों एक-दूसरे को हिम्मत देने के लिए लगातार बातें कर रहे थे और बार-बार कह रहे थे, भाई सोना मत, जागते रहना। जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हुआ तो विशाल ने कहा भी कि सो जाते हैं यार, बचना होगा तो बच जाएंगे, लेकिन दोनों ने एक-दूसरे की आवाज सुनकर आस नहीं छोड़ी। फिर रात करीब 9 बजे सायरन की आवाज आई और रेस्क्यू टीम उन तक पहुंच गई।

रेस्क्यू टीम से कहा मुझे छोड़ो पहले अनुज को निकालो

रेस्क्यू टीम ने जब कटर से विशाल के पैर पर गिरा खंभा हटाया, तो विशाल को लगा कि अब वो बच जाएंगे। उन्होंने खुद से पहले अपने दोस्त की फिक्र की और टीम से कहा मुझे छोड़ो, पहले अनुज को निकालो। हालांकि, विशाल ने बताया कि रेस्क्यू टीम के पास जरूरी मशीनों की कमी थी और वो लोग जुगाड़ से काम कर रहे थे। जैसे-तैसे रात 11 बजे विशाल को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनके शरीर में कई फ्रैक्चर निकले हैं। कानपुर से भागकर आई उनकी बड़ी बहन लवली देवी अस्पताल में उनकी देखभाल कर रही हैं, जबकि उनका दोस्त अनुज अभी भी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। अपने चोटिल पैरों को देखकर दुखी विशाल ने गुस्से में कहा कि गैरकानूनी बिल्डिंग्स बनाने वालों पर सख्त एक्शन होना चाहिए और सरकार को इसका परमानेंट इलाज ढूंढना चाहिए ताकि किसी और के साथ ऐसा न हो।