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विद्यालयों के नामांकन में 2025 तक गिरावट का दौर जारी रहने के आसार

राष्टीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कहा है कि देश में बाल जनसंख्या की वृद्धि दर में गिरावट के कारण प्राथमिक स्कूलों मे नामांकन तेजी से घट रहे हैं। कक्षा एक से पांच तक में नामांकन 2011 से घटने लगे थे। यह सिलसिला 2025 तक जारी रहने की आशंका है।

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राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाड़लवास में आयोजन

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाड़लवास में आयोजन

नई दिल्ली. राष्टीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कहा है कि देश में बाल जनसंख्या की वृद्धि दर में गिरावट के कारण प्राथमिक स्कूलों मे नामांकन तेजी से घट रहे हैं। कक्षा एक से पांच तक में नामांकन 2011 से घटने लगे थे। यह सिलसिला 2025 तक जारी रहने की आशंका है।
एनसीईआरटी की ओर से जारी प्रोजेक्शन और ट्रेंड्स रिपोर्ट में इन आंकड़ों का खुलासा किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि प्राथमिक स्तर पर 2011 से विद्यार्थियों के नामांकन में कमी आई। उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) के नामांकनों में 2016 और माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 से 10) के नामांकनों में 2019 में गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि 2011 से 2025 के बीच नामांकनों में 14.37 प्रतिशत की कमी आने की आशंका है। इस दौरान 13.28 प्रतिशत लड़कों और 15.54त्न लड़कियों के नामांकन कम हो सकते हैं। उच्च प्राथमिक स्तर पर 2016 से 2025 तक नामांकनों में 9.47 प्रतिशत की कमी की आशंका है। इनमें 8.07 प्रतिशत लड़के और 10.94 प्रतिशत लड़कियां होंगी। रिपोर्ट में कहा गया कि 1991 और 2011 के बीच कुल जनसंख्या में 0-6 वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात 18 प्रतिशत से घटकर 13.12 प्रतिशत रह गया। इसका असर नामांकन पर देखा गया। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के नामांकन में गिरावट 1990 से शुरू हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2016 के बीच अनुसूचित जाति के बच्चों के नामांकनों में 5.27 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के नामांकन में 12.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

फैक्ट फाइल

1950 में देश में 2.38 करोड़ विद्यार्थी और 2,171 स्कूल थे।

1950 और 2016 के बीच कक्षा 1 से 10 के लिए नामांकन में 900 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

1,000 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई थी छात्राओं के नामांकन में।

रिपोर्ट का मकसद

एनसीईआरटी ने स्कूलों में 2025 तक के नामांकनों को लेकर अध्ययन किया। इससे स्कूलों को लेकर नीति निर्माण, निवेश के निर्णयों में मदद मिलेगी। इस अध्ययन के आधार पर नए स्कूल खोलने, स्कूलों के उन्नयन और शिक्षकों की नियुक्ति पर फैसला होगा