
Unlikely Paradise में संजय राउत ने शरद पवार को नरेंद्र मोदी और अमित शाह का बड़ा मददगार बताया है। (फ़ाइल फोटो: एएनआई)
देश की राजधानी नई दिल्ली में 23 मार्च की शाम एक किताब का विमोचन हुआ। किताब का नाम है 'Unlikely Paradise' और इसे लिखा है शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राऊत ने। उन्होंने जेल में रहते हुए इसे लिखा था और मराठी में तो 2025 में ही सामने ला दिया था। अब अंग्रेजी और हिन्दी में लेकर आए हैं। इस किताब में कई सनसनीखेज दावे किए गए हैं।
किताब में किए गए दावों से दो अहम सवाल भी खड़े होते हैं। एक तो यह कि क्या राउत के पास किताब में किए गए दावों के समर्थन में कोई सबूत है? दूसरा, क्या संजय राउत एक बार फिर कानूनी झमेले में पड़ सकते हैं? उन्होंने जो दावे किए हैं उन पर उन्हें कोर्ट में खड़ा किया जा सकता है। किताब में किए गए चार दावे हम यहां बता रहे हैं।
यह तो सभी जानते हैं कि जुलाई 2025 में जगदीप धनखड़ ने अचानक उप राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा था कि वह अपने स्वास्थ्य को ज्यादा अहमियत देना चाहते हैं। लेकिन, राउत ने अपनी किताब में कुछ और ही दावा किया है। उनके मुताबिक धनखड़ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दबाव में पद छोड़ा था।
बक़ौल राउत, ऐसी अफवाह उड़ी थी कि धनखड़ और उनकी पत्नी ने जयपुर का अपना घर बेचा था और इससे मिला पैसा विदेश भेजा था। ईडी ने कथित रूप से इस मामले की एक फ़ाइल बनाई थी। जब ऐसी सुगबुगाहट शुरू हुई कि धनखड़ मोदी सरकार के खिलाफ स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक गतिविधियां चला सकते हैं तो कथित तौर पर ईडी की यह फाइल उनके सामने रख कर इस्तीफे का दबाव बनाया गया।
बता दें कि पिछले दिनों राउत ने धनखड़ से मुलाक़ात भी की थी और इस मुलाक़ात की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। वह अक्सर कहते रहते हैं कि धनखड़ से उनके करीबी रिश्ते रहे हैं।
संजय राउत ने किताब में एक और सनसनीखेज दावा किया है। इसमें उन्होंने लिखा है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में नरेंद्र मोदी को 2001 के गुजरात दंगों के सिलसिले में जेल भेजने की अफवाह थी। उस समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री शरद पवार इस राय के खिलाफ थे।
बक़ौल राउत, 'कैबिनेट की बैठक में शरद पवार ने कहा कि लोकतांत्रिक रूप से चुने गए एक मुख्यमंत्री को जेल भेजना सही नहीं होगा।' राउत ने लिखा है, इस राय से कई लोगों ने सहमति जताई और मोदी बच गए। इस तरह की मदद और राजनीति में नैतिकता का ख्याल मोदी को है?'
किताब में एक और सनसनीखेज बात लिखी है। इसमें लिखा है कि शरद पवार और शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने कई आरोपों का सामना कर रहे अमित शाह को बेल पाने में मदद की थी।
किताब के मुताबिक, 'सीबीआई की एक यूनिट में तैनात महाराष्ट्र कैडर का एक अधिकारी शाह की जमानत नहीं होने देने पर अड़ा था। मोदी ने पवार से मदद मांगी। पवार ने अपने स्वभाव के मुताबिक उनकी मदद की और शाह जमानत पर छूट गए।'
संजय राउत ने किताब में यह दावा भी किया है कि पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के घर पर ईडी की रेड पड़ने और उनके परिजनों को समन दिए जाने की वजह यह थी कि लवासा ने नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के चुनाव संबंधी नियमों के उल्लंघन पर उनके खिलाफ रुख अपनाया था। राउत ने लिखा है कि लवासा ने चुनाव आयोग में जनता का भरोसा बहाल करने वाला कदम उठाना शुरू कर दिया था और संभवतः इसीलिए लवासा और उनके परिवारवालों को गंभीर नतीजे भुगतने पड़े। राउत ने यह भी लिखा है कि ईडी के छापों के चलते लवासा को 2020 में इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
संजय राउत ने यह किताब सबसे पहले 'नरकातलं स्वर्ग' (नरक में स्वर्ग) नाम से मराठी में लिखी। इसे 2025 में रिलीज किया गया था। अब उन्होंने चार नए अध्याय जोड़ कर अंग्रेजी में 'अनलाइकली पाराडाइज' नाम से लिखी है। साथ ही, हिन्दी में भी यह किताब पेश की गई है।
संजय राउत 2022 में 1 अगस्त को जमीन घोटाले के आरोप में जेल गए थे। करीब 102 दिन जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली थी। उन्हें सितंबर 2024 में मुंबई की एक स्थानीय अदालत से मानहानि के एक मामले में 15 दिन जेल की सजा भी सुनाई गई थी।
Updated on:
24 Mar 2026 08:16 pm
Published on:
22 Mar 2026 08:22 pm
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