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‘वंदे मातरम्’ पर शशि थरूर ने क्यों पूछ दिया 12 मिनट का सवाल? बोले- हर सरकारी कार्यक्रम में खड़े रहेंगे लोग?

Shashi Tharoor Latest Statement: 'वंदे मातरम' को सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य करने के मुद्दे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 12 मिनट का सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि क्या हर कार्यक्रम में लोगों से इतने लंबे समय तक खड़े रहने की उम्मीद की जाएगी।
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Shashi Tharoor

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'वंदे मातरम' को लेकर उठाया 12 मिनट का सवाल। (फोटो सोर्स- ANI)

Vande Mataram Bill 2026:'वंदे मातरम' को लेकर संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे लेकर सरकार के नए संशोधन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रगीत का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन हर सरकारी कार्यक्रम में इसे अनिवार्य करने से कई व्यावहारिक दिक्कतें भी पैदा हो सकती हैं।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ चर्चा में है। नए प्रावधानों के तहत सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ पूरा ‘वंदे मातरम’ गाने की व्यवस्था की गई है।

शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस फैसले पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का सम्मान करते हैं। उनका कहना है कि ‘वंदे मातरम’ के पहले दो पदों से लोग आम तौर पर परिचित हैं, लेकिन पूरे गीत को हर कार्यक्रम में अनिवार्य करने पर विचार किया जाना चाहिए।

थरूर ने 12 मिनट का हिसाब कैसे बताया?

थरूर ने कहा कि राष्ट्रगान को गाने में करीब 52 सेकंड लगते हैं, जबकि पूरा ‘वंदे मातरम’ गाने में लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है।उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरकारी कार्यक्रमों में राज्य गीत भी गाया जाता है, जिसमें करीब दो मिनट लगते हैं।

थरूर के मुताबिक, अगर राज्य गीत, राष्ट्रगान और पूरा राष्ट्रगीत कार्यक्रम की शुरुआत और फिर अंत में गाया जाए तो लोगों को कुल मिलाकर करीब 12 मिनट तक खड़ा रहना पड़ सकता है।

इसी को लेकर उन्होंने सवाल किया कि क्या हर सरकारी कार्यक्रम में लोगों से इतने लंबे समय तक सम्मान के साथ खड़े रहने की उम्मीद करना सही और व्यावहारिक है?

क्या सम्मान कानून से लागू हो सकता है?

थरूर ने यह भी सवाल उठाया कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान लोगों के मन से आना चाहिए या इसे कानून के जरिए लागू किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि ‘वंदे मातरम’ के प्रति सम्मान बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन अगर इसके लिए बहुत ज्यादा सख्ती की गई तो इसका उलटा असर भी हो सकता है। यानी जिस गीत के प्रति लोगों के मन में सम्मान बढ़ाने की कोशिश हो रही है, वही चीज विवाद का कारण बन सकती है।

क्या है सरकार का नया कदम?

संसद ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित किया है। इसके तहत ‘वंदे मातरम’ को कानूनी सुरक्षा देने और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने का प्रावधान किया गया है।

अब सरकारी कार्यक्रमों में पूरे ‘वंदे मातरम’ को शामिल करने की व्यवस्था पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। एक तरफ इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं शशि थरूर जैसे नेता इसके लागू होने के तरीके और व्यावहारिक असर पर सवाल उठा रहे हैं।

फिलहाल इस मुद्दे ने एक नई बहस छेड़ दी है। राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान जरूरी है, लेकिन क्या इसे हर कार्यक्रम में अनिवार्य करना ही इसका सबसे सही तरीका है?

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