
नई दिल्ली. वीडियो स्ट्रीमिंग का कारोबार दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहा है। लंदन की ग्लोबल एनालिस्ट फर्म ओमडिया की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया कि इस साल पहली बार वैश्विक स्तर पर स्ट्रीमिंग वीडियो वाली कंपनियों की कमाई (213 अरब डॉलर) पे-टीवी की कमाई (188 अरब डॉलर) से ज्यादा हो सकती है।ओमडिया की ‘2025 ट्रेंड्स टू वॉच’ नाम की रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका के पांच बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स, डिज्नी , पैरामाउंट , अमेजन प्राइम वीडियो और मैक्स विज्ञापन, खेलों की बड़ी रेंज और बंडल्ड डिस्ट्रीब्यूशन की वजह से ‘पे-टीवी 2.0’ की तरह दिखने लगे हैं। हर बड़े सब्सक्रिप्शन वाले स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने विज्ञापन वाले प्लान शुरू कर दिए हैं। ओमडिया के सीनियर एनालिस्ट टोनी गुन्नारसन का कहना है कि स्ट्रीमिंग वॉर खत्म हो चुका है। अब विज्ञापन-आधारित मॉडल का दौर है। सब्सक्रिप्शन वीडियो ऑन डिमांड (एसवीओडी) बंडल्स नई हकीकत बन जाएंगे।
भारत में कायम रहेगा पे-टीवी का दबदबा
टोनी गुन्नारसन का कहना है कि वीडियो स्ट्रीमिंग के बड़े बदलाव भारत में सीधे लागू नहीं होंगे। भारत में पे-टीवी का दबदबा लंबे समय तक बरकरार रहेगा। उनके मुताबिक भारत में आने वाले समय में पे-टीवी न सिर्फ राजस्व में आगे रहेगा, बल्कि इसमें वृद्धि भी देखने को मिलेगी। एचबीओ का मैक्स फिलहाल भारत में लॉन्च नहीं हुआ है। इसके लिए यहां जल्द रास्ता खुलने के आसार हैं।
लोकल सेवाओं के साथ पार्टनरशिप
रिपोर्ट में कहा गया कि ओटीटी प्लेटफॉम्र्स की पेड ऑफरिंग का दायरा बढऩे से बाजार में बड़ी ग्लोबल सर्विसेज सीधे उपभोक्ताओं को टारगेट नहीं करेंगी। इसके बजाय वे पे-टीवी या लोकल स्ट्रीमिंग सेवाओं के साथ पार्टनरशिप करेंगी। भारत में विज्ञापन-आधारित बाजार को देखते हुए यह ट्रेंड यहां भी देखने को मिल सकता है। उपभोक्ताओं की विज्ञापन स्वीकार्यता आने वाले समय में बढऩे के आसार है।
Published on:
08 Jan 2025 01:10 am
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