
diesel vehicles in Delhi
सुप्रीम कोर्ट ने आठ माह पुराने आदेश में संशोधन करते हुए राजधानी दिल्ली में 2000 सीसी या इससे ऊपर की डीजल कारों के रजिस्ट्रेशन पर लगी रोक शुक्रवार को हटा ली। मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने हालांकि इसके लिए ऐसे वाहनों की एक्स-शोरूम कीमत का एक प्रतिशत पर्यावरण कर के रूप में जमा कराने का निर्देश दिया। इस कर का भुगतान वाहन निर्माता या डीलर अथवा क्रेता द्वारा किया जाएगा।
कोर्ट ने परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पर्यावरण कर के भुगतान का प्रमाण पत्र देखने के बाद ही 2000 सीसी या इससे अधिक की कारों का पंजीकरण करें। मर्सिडीज बेंज इंडिया ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह दिसम्बर 2015 के अपने आदेश में संशोधन करे।
दो हजार सीसी से अधिक की एसयूवी और लक्जरी कारों के पंजीकरण पर प्रतिबंध से मर्सिडीज बेंज, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा लिमिटेड, टाटा मोटर्स एवं टोयोटा के कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा था और इन वाहन निर्माता कंपनियों ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
इससे पहले एटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि इस बात के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि केवल 2000 सीसी से अधिक की कारें ही सबसे बड़ी प्रदूषक हैं। उन्होंने दलील थी कि अदालत के इस प्रतिबंध से बाहर यह संदेश गया है कि भारत की नीतियां ठीक नहीं है और इसकी वजह से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रभावित हुई है और लाखों लोग रोजगार से वंचित हुए हैं।
Published on:
12 Aug 2016 05:31 pm
बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
