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टैक्सी-एंबुलेंस ड्राइवर्स में अल्जाइमर से मौत का खतरा कम

जीवन चलने का नाम : नेविगेशन से जुड़े काम करने से दिमाग स्वस्थ बनाए रखने में मदद

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लंदन. दुनियाभर के पेशवरों में सिर्फ टैक्सी और एंबुलेंस के ड्राइवर अल्जाइमर बीमारी के खिलाफ ‘गुप्त शक्ति’ रखते हैं। इन दोनों पेशों से जुड़े लोगों में अल्जाइमर से होने वाली मौतें दूसरे लोगों के मुकाबले काफी कम हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपे एक शोध में यह दावा किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि टैक्सी और एंबुलेंस ड्राइवर्स को नियमित रूप से नेविगेशन (मार्गदर्शन) से जुड़े काम करने पड़ते हैं। संभवत: इससे दिमाग को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है।इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के बरमिंघम अस्पताल के वैज्ञानिकों ने यूएस नेशनल वाइटल स्टैटिस्टिक्स सिस्टम से मिले डेथ रिकॉर्ड के डेटा के आधार पर 443 पेशों से जुड़े करीब 90 लाख लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया। अल्जाइमर को इनकी मौत का कारण बताया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि टैक्सी और एंबुलेंस ड्राइवर्स में अल्जाइमर से मौतों का अनुपात सबसे कम था। डेटा के मुताबिक अल्जाइमर के कारण 16,658 टैक्सी ड्राइवर्स में से सिर्फ 171 (1त्न) और 1,348 एंबुलेंस ड्राइवर्स में से सिर्फ 10 (0.74त्न) की मौत हुई। बस ड्राइवर और विमानों के पायलट जैसे दूसरे पेशों में मौतों का आंकड़ा इनसे ज्यादा था।

एक्टिव रहता है दिमाग का हिप्पोकैम्पस

शोधकर्ताओं का मानना है कि मुश्किल जगहों को नेविगेट करते हुए टैक्सी और एंबुलेंस ड्राइवर दिमाग के हिप्पोकैम्पस को एक्टिव रखते हैं। इससे उसकी क्षमता बढ़ती है और अल्जाइमर से जुड़े प्रभावों को धीमा करने या रोकने में मदद मिलती है। हिप्पोकैम्पस दिमाग का वह हिस्सा है, जो याद रखने की शक्ति, सीखने और नेविगेशन को सक्रिय रखता है। इस हिस्से की कमजोरी अलजाइमर का बड़ा कारण है।

सक्रियता और व्यस्तता सेहत की चाबी

अल्जाइमर न्यूरोलॉजिकल समस्या है। दुनियाभर में लाखों लोग इससे पीडि़त हैं। शोध के मुख्य लेखक और बरमिंघम अस्पताल के एमडी विशाल पटेल का कहना है कि दैनिक काम हमारे दिमाग को अप्रत्याशित तरीके से आकार दे सकते हैं। दिमाग को सक्रिय और व्यस्त रखना इसकी सेहत की चाबी है। जीन्स, लाइफस्टाइल और सेहत से जुड़े कई कारकों की अलजाइमर से बचाव में अहम भूमिका है।