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CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में गिनाई गलतियां, सीबीआई के शिकंजे से केजरीवाल और सिसोदिया को नहीं मिलेगी राहत!

Delhi liquor scam: दिल्ली शराब घोटाले में केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 AAP नेताओं को राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। फैसले से असंतुष्ट सीबीआई ने गंभीर खामियों का हवाला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिससे कानूनी संकट अभी बरकरार है।

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Delhi liquor scam Kejriwal and Sisodia will not get relief from the clutches of CBI

Delhi liquor scam: दिल्ली शराब घोटाले के मामले में केजरीवाल और सिसोदिया समेत आम आदमी पार्टी के 23 नेताओं को राहत तो मिल गई है, लेकिन संकट अभी भी बरकरार है, क्योंकि राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले से सीबीआई कतई संतुष्ट नहीं है और अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए अब दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। दायर की गई याचिका में सीबीआई के द्वारा राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले में गंभीर खामियां बताई गई हैं।

सीबीआई ने अपनी अपील में तर्क दिया कि विशेष न्यायाधीश जीतेंद्र सिंह ने मामले की सुनवाई के दौरान तथ्यों का गहन परीक्षण किए बिना ही फैसले में ऐसे निष्कर्ष दे दिए, जो एक तरह से ‘मिनी ट्रायल’ जैसे हैं। एजेंसी का कहना है कि अदालत ने उसके पेश किए गए सबूतों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया और अभियोजन की दलीलों को आंशिक रूप से देखते हुए पूरे कथित षड्यंत्र की कड़ी को नजरअंदाज कर दिया। मामला वर्ष 2021-22 की दिल्ली की नई आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया था। सीबीआई का आरोप है कि नीति तैयार करते समय जानबूझकर ऐसे प्रावधान शामिल किए गए, जिनसे कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचा और इसके एवज में कथित तौर पर आर्थिक लेन-देन हुआ।

सीबीआई की अपील में क्या दलील दी गई?

सीबीआई ने फैसले को चुनौती देते हुए 974 पन्नों की अपील दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि विशेष न्यायाधीश ने आरोप तय करने के शुरुआती चरण में ही ‘मिनी ट्रायल’ जैसा रुख अपनाया। एजेंसी के अनुसार, इस स्तर पर केवल प्रथम दृष्टया मामला देखने की जरूरत होती है, लेकिन अदालत ने पूरे प्रकरण का गहराई से विश्लेषण कर दिया। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि अभियोजन के सबूतों को चुनिंदा तरीके से पढ़ा गया और जांच एजेंसी व जांच अधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियां अनुचित और तर्कहीन हैं।

कोर्ट ने क्यों किया सभी आरोपियों को बरी?

राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जीतेंद्र सिंह ने 27 फरवरी के आदेश में कहा कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए दस्तावेज और साक्ष्य प्रथम दृष्टया भी किसी ठोस अपराध की ओर इशारा नहीं करते। अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री किसी भी आरोपी के खिलाफ गंभीर संदेह तक पैदा करने में नाकाम रही। जज ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सका, जिसके आधार पर मुकदमा चलाया जा सके, और कथित बड़ी साजिश की थ्योरी भी उपलब्ध साक्ष्यों की कसौटी पर खरी नहीं उतरी। इसी वजह से सभी 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया।