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मिराज, जगुआर और मिग की जगह लेगा स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस

भारतीय वायुसेना की ताकत अब और बढ़ने वाली है। सुरक्षा मामलों की केबिनेट कमेटी ने तेजस-2 परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस पर लगभग 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे और विकसित होने वाला स्वदेश निर्मित हल्का लड़ाकू विमान दुश्मन को घर में घुस कर मात दे सकेगा। साथ ही यह विमान पुराने हो रहे वायुसेना के मिराज-2000, जगुआर और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों की चरणबद्ध ढंग से जगह लेगा।

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मिराज, जगुआर और मिग की जगह लेगा स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस

मिराज, जगुआर और मिग की जगह लेगा स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस

नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रंस की लगातार कम हो रही संख्या के बीच अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सुरक्षा मामलों की केबिनेट कमेटी (सीसीएस) ने स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस की ताकत बढ़ाने वाली परियोजना तेजस मार्क-2 को मंजूरी दे दी है।

एलसीए तेजस एमके-1 का विकसित स्वरूप तेजस-2 दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर दोगुनी ताकत से प्रहार करेगा। माना जा रहा है कि अधिक शक्तिशाली इंजन से लैस तेजस मार्क-2 अगले दस साल में फेजआउट होने वाले मिराज-2000, जगुआर और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों की जगह ले सकेंगे।

सूत्रों के अनुसार सीसीएस ने प्रोटोटाइप, उड़ान परीक्षण और प्रमाणन के साथ तेजस-मार्क-2 के डिजाइन और विकास के लिए 6500 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यह राशि पूर्व में स्वीकृत 2500 करोड़ रुपए के अतिरिक्त है। तेजस-2 की पहली उड़ान अगले दो-तीन साल में सामने आने का अनुमान है। माना जा रहा है कि परीक्षण उड़ान और प्रमाणन के बाद तेजस बनाने वाली हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) 2028 से 2030 के बीच इसका उत्पादन शुरू कर देगी। चीन और पाकिस्तान से दोहरी सामरिक चुनौतियों के बीच भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए इसे महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारी पे-लोड ले जाने में सक्षम

तेजस मार्क-2 को लड़ाकू विमानों की नई पीढ़ी का अत्याधुनिक जेट माना जा रहा है। शक्तिशाली जीई 414 इंजन से इसकी हथियार ले जाने की क्षमता भी बढ़ जाएगी। अत्याधुनिक रडार, बेहतर एवियोनिक्स और इलेक्ट्रोनिक्स सिस्टम भी इसे रफाल और अमरीकी सेना के एफ-7 जैसे अत्याधुनिक विमानों की श्रेणी में ला खड़ा करेंगे। सीसीएस ने तेजस मार्क -2 के पूरा होने के बाद महत्त्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर विमान निर्माण के मेगा प्रोजेक्ट के विकास को मंजूरी देने की भी योजना बनाई है।

चुनौतियों के बीच बेड़े में अभी है कमी

-रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीसीएस ने सही वक्त पर सही फैसला किया है। चीन-पाकिस्तान की दोहरी चुनौती के बीच फिलहाल वायुसेना के लड़ाकू विमानों की संख्या कम है। वायुसेना में अभी स्वीकृत 42 में से 30-32 स्क्वाड्रन ही मौजूद हैं।

-सुखोई और रफाल विमानों के आने के बाद इस कमी को तेजी से पूरा करने के उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में तेजस मार्क-1 के 83 और विमान खरीदने के लिए एचएएल के साथ करार किया था। इसके तहत 48 हजार करोड़ रुपए की लागत से 73 लड़ाकू और 10 ट्रेनर तेजस-1 विमान खरीदे जाने हैं। इनकी सुपुर्दगी 2024 से 2028 तक की जानी है।

-लाइटवेट तेजस मार्क-1 मुख्य रूप से वायु रक्षा के लिए है, जबकि मध्यम वजन के मार्क-2 फाइटर विमान भारी हथियारों के साथ दुश्मन के इलाके में आक्रामक अभियानों के लिए उपलब्ध होंगे।

तेजस-1 मनवा चुका है लोहा

फरवरी 2019 में वायुसेना में शामिल तेजस-1 विमान अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवा चुका है। एल्युमुनियम, लिथियम एलॉय, कार्बन फॉइबर कंपोजिट्स और टाइटेनियम एलॉय स्टील से बना 6560 किलोग्राम वजन का यह विमान दूसरे लड़ाकू विमानों की तुलना में काफी हल्का है। लैंडिंग और टेकऑफ के लिए भी इसे बहुत कम जगह चाहिए। मलेशिया, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मिस्र और अर्जेंटीना भी तेजस विमान खरीदने में रुचि दिखा चुके हैं।