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राजस्थान में सरकार नाम की कोई चीज नहीं: सचिन पायलट

- कानून व्यवस्था चौपट, सत्ता के कई केंद्र - कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव से विशेष साक्षात्कार

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शादाब अहमद

नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट इन दिनों हरियाणा व जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों के प्रचार में जुटे हुए हैं। वे लगातार सभाएं कर रहे हैं। हरियाणा के रेवड़ी व महेन्द्रगढ़ में चुनावी रैलियों के बीच पायलट ने पत्रिका से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि राजस्थान में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। नौकरशाहों के माध्यम से राजस्थान सरकार को दिल्ली चला रही है। कानून व्यवस्था चौपट हो गई है। सत्ता के कई केन्द्र बन चुके हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में एलजी के माध्यम से डबल इंजन सरकार चलाई, लेकिन चुनाव में अपने कामकाज गिनाने की बजाय पाकिस्तान के भरोसे हो गए। वहीं हरियाणा में कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा को लेकर मचे घमासान पर पायलट ने कहा कि गुटबाजी कोई मुद्दा नहीं है। जनता भाजपा के दस साल के कुशासन से निजात चाहती है।

सवाल: राजस्थान की बीजेपी सरकार के काम काज को किस तरह से देखते हैं?

जवाब: कामकाज, कौन सा काम! यही नहीं पता कि कौन सरकार में मंत्री हैं, कौन नहीं है। फिर कहां से काम होंगे। संगठन कुछ बात बोलता है और सरकार खंडऩ करती है। इतने सारे सत्ता के केंद्र बन गए हैं। रोज खीचतान की नई खबरें आती हैं। इसका नुकसान जनता को हो रहा है। जनता बड़ी उम्मीद के साथ सरकार चुनती है। हैरानी की बात है कि इतनी जल्दी जनता का मोह भंग इस सरकार से हो गया। विकास के काम नहीं हो पा रहे हैं। इस बार गर्मी में बिजली पानी के कुप्रबंधन को सबने देखा है। लॉ एंड ऑर्डर चरमरा गया है। भिवाड़ी, नीमराना, जोधपुरे अजमेर में हुई आपराधिक घटनाएं हो रही है। बच्चियों से बलात्कार की घटनाएं लगातार बड़ रही है। सरकार का कंट्रोल नहीं है। इतनी जल्दी जनता का विश्वास खो देना, मैंने पहली बार देखा है।

सवाल: ऐसा कहा जाता है कि राजस्थान सरकार दिल्ली से चल रही है, आप क्या मानते हैं?

जवाब: यह तो हकीकत है, राजस्थान के साथ छत्तीसगढ़ के भी यही हाल है। वहां का मैं प्रभारी हूं और मैं देखता हूं कि वहां पर सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। दिल्ली से राजस्थान व छत्तीसगढ़ में जो आदेश हो गया, उसकी पालना करनी है। नौकरशाहों के माध्यम से सरकारों को दिल्ली चला रही है। राजस्थान व छत्तीसगढ़ के मंत्री वहीं काम कर रहे हैं, जो उनको निर्देशित किया जा रहा है। इसके चलते सत्ता के कई केन्द्र बन गए हैं।

सवाल: पिछले सालों में आपके व अन्य कांग्रेस नेताओं के बीच काफी कुछ घटा  है। कांग्रेस की सरकार भी चली गई। अब आप लोगों के आपस में कैसे रिश्ते हैं?

जवाब: आप भी इतिहास जानते हो, कांग्रेस पहले जब चुनाव हारती थी तो कभी 20-21 तो कभी 50 विधायक चुनाव जीतते थे। पिछले चुनाव में 72 विधायक जीतकर आए हैं। लोकसभा चुनाव में गठबंधन ने 11 सीटें जीती। यह हमारी एकजुटता के चलते हुआ है। सभी नेता एकजुट होकर काम कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष के रूप में युवा नेता टीकाराम जूली अच्छी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वहीं प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा, प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा मेहनत कर रहे हैं। हम टीम वर्क के साथ काम कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं में जोश है और भाजपा से लोगों का मोहभंग हो रहा है। बहुत जल्द राजस्थान में बदलाव होगा।

सवाल: राजस्थान में विधानसभा की 7 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, क्या इससे सरकार को कामकाज की कसौटी पर कसा जाएगा?

जवाब: हर चुनाव सरकार की विश्वसनीयता का मापदंड ही होता है। कोई कुछ भी कहे, लेकिन उपुचनाव में सत्ताधारी दल का प्रभाव अधिक रहता है। इस बार जहां भी उपचुनाव होंगे, वहां हम जीतेंगे। दस महीनों में इस सरकार से ऊब चुके हैं और निराश हो चुके हैं।

सवाल: जहां उपचुनाव है, वहां पर आपका प्रभाव माना जाता है। टिकट वितरण में आपका दखल होगा?

जवाब: चुनाव जीतने वाला नेता पूरी पार्टी का होता है। जो निर्णय किया जाएगा, वो पार्टी में बैठकर होगा। वैसे भी हमारे यहां संगठन ने काम शुरू कर दिया है। कमेटी बन गई है। नेताओं के दौरे हो रहे हैं और चर्चा भी चल रही है। निर्णय किसी व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि सामूहिक होगा।

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