
Haunted bungalow in Delhi: इन दिनों दिल्ली के ऐसे 'मनहूस बंगला' की चर्चा हो रही है, जिसको लेकर मिथक है कि इस बंगले में जो भी रहने के लिए आता है, वह यहां पर टिक नहीं पाता है। मिथक से जोड़कर माना जाता है कि इस आवास में आने के बाद दिल्ली के तीन मुख्यमंत्रियों ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर किया। इसके साथ ही बड़े-बड़े नेताओं और अफसरों ने भी इस बंगले से दूरी बनाए रखी। अब बताया जा रहा है कि 20 साल बाद फिर इस बंगले को रहने योग्य बनाने के बारे में विचार किया जा रहा है। फिलहाल जानिए इस आवास के बारे में मिथक और उससे जुड़ी कई घटनाएं।
आपको बता दें कि दिल्ली में यह बंगला नई दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में स्थित 33 शामनाथ मार्ग पर स्थित है। पिछले कई दशकों में इस बंगले में रहने वालों के साथ कुछ ऐसी घटनाएं घटीं, जिसके बाद लोगों ने इसे 'मनहूस बंगला' का रूप दे दिया। गौरतलब है कि इस बंगले में रहने वाले 3 ऐसे मुख्यमंत्रियों की चर्चा की जाती है, जो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। आइए जानते हैं तीनों पूर्व सीएम और उनके कार्यकाल के बारे में।
आपको बता दें कि दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश 17 मार्च 1952 से 12 फरवरी 1955 तक इस पद पर रहे थे। यह उनका पहला और एकमात्र मुख्यमंत्री कार्यकाल था। चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने ही इस बंगले को अपना पहला निवास बनाया था और उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही समाप्त हो गया था।
मदन लाल खुराना 2 दिसंबर 1993 को दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे, जब दिल्ली में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए और भाजपा ने जीत हासिल की। वे दिल्ली के दूसरे निर्वाचित मुख्यमंत्री थे। उनका कार्यकाल करीब ढाई साल चला और 26 फरवरी 1996 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया।
साहिब सिंह वर्मा 26 फरवरी 1996 को दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे और वे 12 अक्टूबर 1998 तक इस पद पर रहे। वे मदन लाल खुराना के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने थे और उनका कार्यकाल करीब ढाई साल का रहा। वे भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और उनकी जगह सुषमा स्वराज ने ली, जो दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
कहा जाता है कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी इस बंगले में रहने से साफ मना कर दिया था। इसके बाद लगभग दस साल तक कोई भी नेता या बड़ा अधिकारी इस मकान में रहने को तैयार नहीं हुआ। इस बंगले को लेकर बनी डर और अपशकुन की छवि इतनी मजबूत थी कि सभी इससे दूरी बनाए रखते थे। साल 2013 में वरिष्ठ नौकरशाह शक्ति सिन्हा ने यहां रहने का फैसला लिया, जिससे लोगों को लगा कि शायद पुराने मिथक टूट जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वे महज चार महीने ही इस बंगले में रह पाए। इसके बाद उन्हें दिल्ली सरकार से हटना पड़ा, जिससे इस बंगले से जुड़ी रहस्यमयी चर्चाएं और भी तेज हो गईं।
करीब बीस साल बाद एक बार फिर इस बंगले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हाल ही में सोशल वेलफेयर मंत्री रविंदर इंद्राज सिंह ने इस आवास का निरीक्षण किया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। हालांकि, उन्होंने अभी तक आधिकारिक तौर पर यहां रहने का फैसला नहीं लिया है और दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। अगर वे इस बंगले को अपना निवास बनाते हैं, तो ऐसा पहली बार होगा जब वर्षों से ‘मनहूस बंगला’ कहलाने वाले इस घर से जुड़ी कहानी एक नए मोड़ पर पहुंचेगी।
Updated on:
24 Jan 2026 06:15 pm
Published on:
24 Jan 2026 06:14 pm
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