भारत बायोटेक, फाइजर और ऑक्सफोर्ड में किसकी Corona Vaccine जीतेगी

  • भारत में कोरोना वैक्सीन की मंजूरी पाने की रेस में हैं कई कंपनियां।
  • स्वदेशी भारत बायोटेक, फाइजर, ऑक्सफोर्ड ने वैक्सीन पर मांगी है स्वीकृति।
  • वैक्सीन ही नहीं इसकी कीमत और रखरखाव के बारे में भी विचार है जरूरी।

नई दिल्ली। भारत बायोटेक, फाइजर और ऑक्सफोर्ड ये तीनों ही कंपनियां कोरोना की वैक्सीन बना रही हैं। मसला ये है कि इन तीनों कंपनियों में से भारत में कौन सी वैक्सीन को सबसे पहले मंजूरी मिलती है। ये तीनों ही कंपनियां अलग-अलग देशों से ताल्लुक रखती हैं। इनमें शामिल है अमरीका की कंपनी फाइजर, ब्रिटेन की कंपनी आक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका और भारत की कंपनी भारत बायोटेक।

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कोविड वैक्सीन को लेकर भारत ने किसी भी कंपनी की वैक्सीन को लेकर अपनी स्वीकृति नहीं जताई है। हो सकता है कि 2021 के पहले महीने में भारत में सबसे पहले आने वाली वैक्सीन को मंजूरी दी जाए। लेकिन अभी तक ये तय नहीं हो पाया है कि भारत में कौन से देश के कोरोना टीके को मौका दिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार अभी तक भारत में भारत बायोटेक के अलावा कोविड वैक्सीन को लेकर फाइजर और ऑक्सफोर्ड जैसी कंपनियों ने अप्रोच किया है। लेकिन इन तीनों में से अभी तक भारत की तरफ से किसी को मंजूरी नहीं दी गई है।

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भारत बायोटेक

सबसे पहले हैदराबाद स्थित कंपनी भारत बायोटेक की बात करते हैं। हैदराबाद बेस्ड कंपनी भारत बायोटेक और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के सहयोग से कोरोना टीके को तैयार किया जा रहा है। भारत बायोटेक ने सबसे पहले 7 दिसंबर को भारत में वैक्सीन इस्तेमाल करने की मजूरी मांगी थी, लेकिन सरकार की तरफ से इसे खारिज कर दिया गया था।

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इसके बाद फिर से 23 दिसंबर को भारत बायोटेक ने सरकार को वैक्सीन इस्तेमाल करने की मंजूरी मांगी थी। बहरहाल, अभी तक कंपनी के पास सरकार की तरफ से वैक्सीन के ट्रायल के लिए कोई भी मंजूरी नहीं आई है। वैक्सीन पैनल का मानना है कि कंपनी को फेज 1 और फेज 2 के साथ-साथ फेज-3 के लिए भी ट्रायल डेटा देना चाहिए था। फेज-3 ह्यूमन ट्रायल होता है।

फाइजर

भारत में सबसे पहले इस्तेमाल की जाने वाली अमरीकी कंपनी फाइजर मानी जा रही है। फाइजर ऐसी पहली कंपनी है, जिसने भारत में कोरोना वैक्सीन के लिए अप्रोच किया था। 4 दिसंबर को सबसे पहले फाइजर ने भारत को अप्रोच किया। भारत ने अभी तक किसी भी देश की वैक्सीन को मंजूरी नहीं दी है।

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फाइजर की बात करें तो इसे अमरीका, यूके और कनाडा जैसे देशों से वैक्सीन के लिए मंजूरी मिल चुकी है। माना जा रहा है कि फाइजर बाकी देशों की कंपनियों से महंगी है, इसके साथ ही इस वैक्सीन का रखरखाव भी बाकी वैक्सीन के मुकाबले अलग है।

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ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका

फाइजर के बाद सीरम इंस्टीट्यूट वाली ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ने कोरोना वैक्सीन इस्तेमाल के लिए अप्लाई किया था। इस कंपनी ने 6 से 7 दिसंबर तक कोविड वैक्सीन को यूज करने की स्वीकृति मांगी थी। सूत्रों की माने तो ऑक्सफोर्ड ने वैक्सीन से रिलेटेड सारा डेटा पैनल अफसरों को सौंप दिया है। आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो कोविड वैक्सीन के लिए फाइजर के बाद ऑक्सफोर्ड की भी संभवाना ज्यादा नजर आ रही है।

जायडस कैडिला

सबसे आखिर में बात करते हैं जायडस कैडिला की। कोरोना वैक्सीन की रेस में ये सबसे पीछे रही है। खबर है कि इस कंपनी ने अभी तक फेज 1 और फेज 2 के क्लीनिकल ट्रायल कर लिए हैं। सबसे अहम बात ये की इन ट्रायल्स में कोई भी साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला है।

खबर तो ये भी है कि आने वाले साल में कोरोना वैक्सीन के एक्सपर्ट पैनल सीरम इंस्टीट्यूट वाली वैक्सीन को तत्कालीन इस्तेमाल के लिए एक पहला चांस दे सकते हैं।

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अमित कुमार बाजपेयी
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