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मोदी सरकार ने क्यों की आडवाणी को भारत रत्न की सिफारिश?

पार्टी के पुराने काडर में उत्साह

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नवनीत मिश्र

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते शनिवार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के लिए भाजपा के संस्थापकों में से एक और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री 96 वर्षीय लालकृष्ण आडवाणी के नाम की घोषणा कर पार्टी के पुराने काडर में उत्साह का संचार कर दिया। ये वो काडर रहा, जो अटल-आडवाणी के दौर से पार्टी के लिए जीजान से जुटा रहा और पीढ़ी परिवर्तन के दौर में खुद को असहज पा रहा था। जब प्रधानमंत्री मोदी ने खुद आडवाणी के नाम का एक्स पर ऐलान किया तो खांटी कार्यकर्ता गदगद हो उठे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और नाना जी देशमुख के बाद ये सम्मान पाने वाले वे संघ परिवार और भाजपा के तीसरे नेता और देश की 50 वीं हस्ती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आडवाणी को भारत रत्न की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घोषणा करते हुए देश के विकास में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें दौर के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी संसदीय यात्रा अनुकरणीय और समृद्ध नज़रिए से भरी रही है।

राजनीति को दोनों छोर साधने की कोशिश

यह संयोग ही है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और सामाजिक न्याय के चेहरे कर्पूरी ठाकुर के नाम की घोषणा के 10 दिन बाद ही राम मंदिर आंदोलन के सूत्रधार रहकर देश में हिंदुत्व के मुद्दे को धार देने वाले आडवाणी को भी भारत रत्न देने का निर्णय सरकार ने किया। इस निर्णय को राजनीति के दोनों छोर यानी मंडल और कमंडल को एक साथ साधने की भाजपा की रणनीति बताई जा रही है। आडवाणी से पहले 23 जनवरी को कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा हुई थी। प्रधानमंत्री की सिफारिश पर यह सर्वोच्च सम्मान राष्ट्रपति प्रदान करते हैं।

मोदी सरकार में 7 लोगों को मिल चुका सर्वोच्च सम्मान

- मदन मोहन मालवीय
- अटल बिहारी वाजपेयी
- प्रणब मुखर्जी
- भूपेन हजारिका
- नानाजी देशमुख
- कर्पूरी ठाकुरलालकृष्ण आडवाणी

मैं पूरी विनम्रता और कृतज्ञता के साथ भारत रत्न स्वीकार करता हूं। यह न केवल एक व्यक्ति के रूप में मेरे लिए सम्मान की बात है, अपितु उन आदर्शों और सिद्धांतों का भी सम्मान है, जिनकी मैंने पूरी क्षमता से जीवन पर्यंन्त सेवा करने का प्रयत्न किया। मेरा जीवन मेरे राष्ट्र के लिए है।

- लालकृष्ण आडवाणी