
aadhar card
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी कर पूछा कि जन वितरण प्रणाली के तहत सब्सिडी वाला अनाज लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य क्यों किया गया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.रोहिणी तथा न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा की एक खंडपीठ ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं जन वितरण मंत्रालय तथा दिल्ली सरकार से मामले की अगली सुनवाई की तारीख 24 अप्रैल से पहले नोटिस का जवाब मांगा।
गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) दिल्ली रोजी रोटी अधिकार अभियान ने जनहित याचिका दाखिल कर न्यायालय से केंद्र सरकार द्वारा आठ फरवरी को जारी उस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की, जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत सब्सिडी वाला अनाज खरीदने के लिए आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।
केंद्र सरकार की अधिसूचना असम, मेघालय तथा जम्मू एवं कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मान्य है। याचिका के मुताबिक, अधिसूचना के क्रियान्वयन के कारण लोग एनएफएसए के तहत अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं और यह संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 21 का उल्लंघन करता है। एनएफएसए के तहत वैसे खरीदार जिनके पास आधार कार्ड नहीं है, या अभी तक उन्होंने इसे बनाने के लिए पंजीकरण नहीं कराया है, लेकिन एनएफएसए के तहत सब्सिडी वाला अनाज लेने के इच्छुक हैं, तो उन्हें 30 जून तक आधार पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा।
प्रधानमंत्री उज्जावला योजना का लाभ उठाने के लिए केंद्र सरकार ने आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। प्रधान मंत्री उज्जवला योजना का लाभ उठाकर मुफ्त में एलपीजी पाने के लिए सरकार अब गरीब महिलाओं के लिए आधार कार्ड कर रही है। एक तरफ आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है तो दूसरी तरफ सरकार धीरे-धीरे अधिकतर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए इस अनिवार्य करती जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने ऐच्छिक तौर पर चार योजनाओं में आधार कार्ड को लागू करने पर मंजूरी दी थी। इसमें मनरेगा, पेंशन, एलपीजी कनेक्शन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं को शामिल करने की अनुमति दी थी। पर यह अनिवार्य न होकर ऐच्छिक तौर पर था।
Published on:
09 Mar 2017 03:18 pm
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