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भूखे न सोएं… इसलिए सप्ताह में तीन दिन जरूरतमंदों को भोजन कराती हैं महिलाएं

मानवता : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में 10 साल से चल रहा है सिलसिला

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अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की समाज सेवी वंदना दत्ता को लगा कि कई जरूरतमंदों को रात को भोजन नहीं मिल पाता। उन्होंने भूखों को खाना खिलाने की शुरुआत की। उनके इस कार्य में अन्य महिलाओं ने भी साथ दिया। धीरे-धीरे महिलाओं की संख्या बढ़ती गई। वंदना दत्ता 10 साल पहले अपने घर से चावल-दाल, सब्जी बनाकर कंपनी बाजार ले गईं और भूखों को खाना खिलाया। यह सिलसिला आज तक जारी है। उनके साथ कई महिलाएं सप्ताह में तीन दिन जरूरतमंदों को भोजन कराती हैं। वंदना दत्ता का मानना है कि कोई भी व्यक्ति रात को भूखा पेट न सोए, इसलिए हम सभी बहनें जरूरतमंदों को भोजन कराने के लिए उत्साहित रहती हैं।

रात्रिकालीन भोजन

इस सेवा का नाम रात्रिकालीन भोजन रखा गया है। इसमें महिला समाज सेवियों की संख्या 20 हो गई है। सोमवार, बुधवार व शुक्रवार की रात भोजन कराया जाता है। सभी महिलाएं अपने-अपने घरों से कुछ न कुछ बनाकर लातीं हैं और कंपनी बाजार में रहने वाले जरूरतमंदों को पंगत में बैठाकर खिलातीं हैं।

कोरोना काल में भी बंद नहीं हुई सेवा

यह सेवा 20 मई, 2015 से चल रही है। करीब 50 लोगों को भोजन कराया जाता है। सेवा कोविड काल के दौरान भी बंद नहीं हुई। उस समय इसकी ज्यादा जरूरत थी। -वंदना दत्ता, समाजसेवी

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