श्रीगंगानगर.प्रारंभिक शिक्षा विभाग में चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। जिले के 105 स्कूल ऐसे हैं, जिनकी हालत इतनी खराब है कि बच्चों को इन स्कूलों में बैठाना संभव नहीं रहा। इन स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति के कारण कभी भी हादसा होने का खतरा मंडरा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई व बैठने की व्यवस्था बंद कर दी गई है। इसके स्थान पर बच्चों को अब विभिन्न सुरक्षित स्थानों जैसे आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन, पीएचसी, ग्राम पंचायत भवन या अन्य सरकारी और निजी भवनों में स्कूल संचालन किया जा रहा है। इनमें से कुछ स्कूल तो शेड के नीचे संचालित हो रहे हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित तक नहीं हैं।
भवनों की मौजूदा स्थिति का किया मूल्यांकन
समग्र शिक्षा विभाग ने जिले भर से करीब 80 से अधिक कनिष्ठ अभियंता एवं सहायक अभियंताओं की मदद से इन स्कूल भवनों का सर्वेक्षण किया गया है। तकनीकी अधिकारियों ने इन भवनों की मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन किया और मरम्मत की आवश्यकता वाले भवनों की सूची तैयार की है।
फैक्ट फाइल
- जर्जर स्कूल भवन: 115
- भवन जर्जर घोषित: 35
- पूर्ण जर्जर कक्ष: 3,377
- मरम्मत योग्य कक्ष: 3,626
- मरम्मत के लिए आवश्यक राशि:14,504,000 लाखों में
एस्टीमेट तैयार
जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए एस्टीमेट तैयार कर विभाग को भेज दिया गया है। बजट स्वीकृति मिलते ही इन स्कूल भवनों की मरम्मत और नए कक्षों का निर्माण शुरू किया जाएगा।
अरविंदर सिंह,एडीएपीसी, समग्र शिक्षा अभियान, श्रीगंगानगर
विकल्प के तौर पर अन्य भवनों में संचालन
इलाके में पिछले दिनों हुई बारिश और समय के साथ इन भवनों की हालत और भी खराब हो गई है। किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए यह फैसला लिया गया है कि जिले के 105 प्रारंभिक स्कूलों को विकल्प के तौर पर अन्य भवनों में संचालन करने का निर्णय लिया गया है।
हीरालाल बिश्नोई (प्रारंभिक), जिला शिक्षा अधिकारी, श्रीगंगानगर