
गणपति जी को विघ्नहर्ता माना जाता है। सभी शुभ कार्यों से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। जिस घर पर गणेश जी की कृपा होती है उस घर में कभी बरकत कम नहीं होती है। घर में कभी अनाज, धन का अभाव नहीं होता। इसके साथ ही गणेश जी वास्तु के लिए भी बहुत शुभ माने जाते हैं। जी हां, वास्तु के अनुसार गणेश जी के कई नाम और स्वरुप हैं। कहा जाता है कि जातक अपनी मनोकामनाओं के अनुसार यदि घर में गणपति जी की प्रतिमा स्थापित करता है तो उसे मनवांछित फल प्राप्त होता है। तो आइए जानते हैं किस मनोकामना के लिए कौन सी प्रतिमा स्थापित करना चाहिए....
जिस घर में कोई संतान नहीं है और संतान होने में समस्याएं आ रही हो तो वास्तु के अनुसार ऐसे घर में संतान गणपति की प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए।
जिस घर में कलह, विघ्न, अशांति, क्लेश, तनाव, पति-पत्नी में मनमुटाव, बच्चों में अशांति का दोष होता है। ऐसे घर के प्रवेश द्वार पर विघ्नहर्ता गणपति की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
धनदायक गणपति की प्रतिमा घर के अंदर या फिर मुख्य द्वार पर स्थापित करें, इससे घर में दरिद्रता का लोप, सुख-समृद्धि व शांति हमेशा बनी रहती है।
यदि घर में कोई युवक युवती है जिसकी शादी नहीं हो रही है तो ऐसे लोग अपने घर में गणपति जी के विवाह विनायक रुप की मूर्ति स्थापित करें। विवाह जल्द तय होंगे।
कोई पुराना ऋण, जिसे चुकता करने की स्थिति में न हो, तो ऋण मोचन गणपति घर में लगाना चाहिए।
यदि कोई पुराना रोग पीछा नहीं छोड़ रहा या कोई ऐसा रोग हो गया हो जो दवा से ठीक न होता है, उन घरों में रोगनाशक गणपति की स्थापना व आराधना करनी चाहिए।
कार्य में सफलता व साधनों की पूर्ति के लिए सिद्धिनायक गणपति को घर में लाना चाहिए।
Published on:
28 Apr 2019 06:31 pm
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