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एम्बुलेंस चालक ने किया आत्मदाह का प्रयास, अधिकारी की प्रताडऩा से हो गया था परेशान

सागर. जिला अस्पताल परिसर के डफरिन अस्पताल के बाहर दोपहर करीब 2 बजे 108 एम्बुलेंस के एक चालक ने डीजल उड़ेलकर खुदकुशी की कोशिश की। गनीमत रही कि उसके अन्य साथियों ने उसे खुद को आग लगाने से बचा लिया। चालक ने 108 के जिला अधिकारी रविंद्र खरे पर प्रताडऩा के गंभीर आरोप लगाए। एम्बुलेंस […]

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सागर

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Murari Soni

Jun 16, 2024

सागर. जिला अस्पताल परिसर के डफरिन अस्पताल के बाहर दोपहर करीब 2 बजे 108 एम्बुलेंस के एक चालक ने डीजल उड़ेलकर खुदकुशी की कोशिश की। गनीमत रही कि उसके अन्य साथियों ने उसे खुद को आग लगाने से बचा लिया। चालक ने 108 के जिला अधिकारी रविंद्र खरे पर प्रताडऩा के गंभीर आरोप लगाए। एम्बुलेंस चालक गोपालगंज थाना पहुंचे और पुलिस को आपबीती सुनाई, हालांकि शाम तक पुलिस ने किसी भी पक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी।चालक योगेश प्रजापति ने बताया कि 108 डीएम रविंद्र खरे ने उन्हें मानसिक रूप से इतना प्रताडि़त कर दिया था कि उन्हें खुदकुशी करने मजबूर होना पड़ा। गाड़ी का मेंटेनेंस नहीं है, वाहन के टायर घिस चुके हैं और मरीज को भोपाल ले जाने के लिए कहा जाता है। जब भी समस्या बताई जाती है तो ड्यूटी नहीं देते। इस माह मेरा वेतन मात्र 5 दिन का बनाया है। 10 हजार रुपए वेतन है और 1 हजार रुपए ही वेतन दिया गया, इन पैसों से मैं अपना परिवार कैसे पालूं। इसके अलावा अधिकारी चालकों से पैसों की डिमांड करते हैं। एक दिन पहले ही अधिकारी से अपनी समस्या बताई थी लेकिन अधिकारी ने एक न सुनी। अधिकारी ने गढ़ाकोटा में ट्रांसफर किया और अब राहतगढ़ जाने का बोल दिया।अन्य चालकों ने भी लगाए आरोप-शनिवार की शाम करीब 4.30 बजे एम्बुलेंस के अन्य चालक, आनंद अग्निहोत्री, बलवंत राजपूत, मुकेश तिवारी, प्रभात वर्मा, शिवम यादव, हेमंत राजपूत, नरेंद्र वर्मा, मनीष रोहित, हिमांशु गोपालगंज थाना पहुंचे। अन्य चालकों ने भी पुलिस को बताया कि 108 के जिला अधिकारी उनके साथ भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं। 500-500 किमी गाड़ी चलाने का टारगेट दिया जाता है। असाइनमेंट न होने के बाद भी पहुंचाया जाता है। चालकों ने फर्जी असाइनमेंट बनाने के आरोप भी लगाए हैं।

चालकों के आरोप गंभीर होनी चाहिए जांच-

एम्बुलेंस चालकों ने अपने अधिकारी पर अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसमें उन्होंने बताया है कि जिले में 108 और जननी के करीब 90 वाहन हैं। वाहनों को सडक़ों पर जबरदस्ती दौड़ाने के टारगेट और इमरजेंसी वाहनों में जरूरी सुविधाएं न होने और समय पर मेंटेनेंस न होने से कभी भी इन वाहनों से हादसा हो सकता है। जिला अस्पताल से फर्जी असाइनमेंट की बात भी सामने आई है। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारी को इसकी बारीकी से जांच कराना चाहिए।

-मेरे पास अभी कोई शिकायत नहीं आई है, शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। चालक यदि पैसों की डिमांड और फर्जी असाइनमेंट जैसे आरोप लगा रहे हैं तो यह गंभीर बात है। जिसकी जांच कराई जाएगी।

डॉ. ममता तिमोरी, सीएमएचओ सागर।