
जयपुर. पुरातत्व विभाग ने तिजोरी आमदनी से रोशन करने के लिए 1 जनवरी से स्मारकों पर लगने वाले प्रवेश टिकट की दरों को बढ़ा दिया, लेकिन पर्यटकों के लिए बेहतर लाइटिंग, पार्किंग की सुविधाएं दूर की कौड़ी हैं। विभाग आमेर महल में आने वाले पर्यटकों से दस से बारह करोड़ रुपए की कमाई कर रहा है और अब टिकट की दर बढ़ने से कमाई भी दोगुनी हो जाएगी। महंगा टिकट लेकर शाम को महल देखकर लौटने वाले पर्यटक इन दिनों खासे परेशान हो रहे हैं। सर्दी के मौसम में शाम 5 बजे बाद अंधेरा होने लगता है, लेकिन सीढियों वाले इस रास्ते पर लाइटिंग की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। पर्यटक मोबाइल फोन की रोशनी या टार्च की रोशनी के सहारे सीढियों के रास्ते नीचे उतरते हैं। पर्यटकों के मन में सीढ़ी दर सीढी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
अन्य स्मारकों पर भी अव्यवस्थाएं
हवामहल, अल्बर्ट हाॅल, जंतर-मंतर पर भी पर्यटक ऐसी ही अव्यवस्थाओं से रूबरू होते हैं। अल्बर्ट हॉल पर तो पार्किंग को लेकर आए दिन पर्यटकों व पार्किंग ठेकेदार के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। पुरातत्व विभाग के निदेशक इसी पार्किंग से महज 10 कदम दूर अल्बर्ट हाॅल के ऊपरी कक्ष में बैठते हैं।
कम हो रही है पर्यटकों की संख्या
शहर के स्मारकों पर बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से पर्यटकों की संख्या दिनों दिन घट रही है। यही वजह है कि 2024 में पर्यटकों की संख्या के मामले में जयपुर छठे नंबर पर खिसक गया था।
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विभाग ने जब महल में प्रवेश का शुल्क बढ़ाया है तो पर्यटकों को सुविधाएं भी देनी चाहिए। महल में प्रवेश व वापसी के रास्ते पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। अभी पर्यटक मोबाइल या टाॅर्च की रोशनी के सहारे महल से नीचे उतर रहे हैं। पर्यटकों को तो परेशानी हो ही रही है, राजस्थान पर्यटन की छवि भी खराब हो रही है।
मनीष शर्मा, जयपुर-आमेर विरासत फाउंडेशन
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महल तक पहुंच व वापसी के रास्ते में रोशन की व्यवस्था नहीं होने पर मोबाइल से रोशनी कर नीचे आए। पर्यटकों को परेशानी नहीं इसके लिए जिम्मेदारों को व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए।
राजेश कुमार, निवासी-कानपुर, उत्तर प्रदेश
Published on:
05 Jan 2026 12:17 pm
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