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अंतिम संस्कार के समय ध्यान रखे ये चीजे, नहीं तो मरने वाले को नहीं मिलती मुक्ति

अंतिम संस्कार के समय ध्यान रखे ये चीजे, नहीं तो मरने वाले को नहीं मिलती मुक्ति

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Shyam Kishor

Jun 20, 2018

antim sanskar

अंतिम संस्कार के समय ध्यान रखे ये चीजे, नहीं तो मरने वाले को नहीं मिलती मुक्ति


- मृत्यु जीवन का अटल सत्य हैं, जिसने जन्म लिया उसे एक ना एक दिन मरना भी है, लेकिन अगर परिवार किसी की मृत्यु हो जाती हैं तो लोग उसके अंतिम संस्कार की बहुत जल्दबाजी करने लगते है, लेकिन शास्त्रों में उल्लेख आता हैं कि शव का अंतिम संस्कार जल्दबाजी में बिलकुल भी नहीं करना चाहिए, अगर किसी व्यक्ति की सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त से 2 घंटे पहले मृत्यु हो गई हो, अर्थात दिन में, तो शव का 9 घंटे के अदंर अंतिम संस्कार कर देना चाहिए । लेकिन अगर किसी की मृत्यु रात में हुई है तो फिर उसका अंतिम संस्कार सुबह 10 बजे तक कर देना चाहिए । ऐसी मान्यता है कि यमराज अगर गलती से किसी के प्राण हर लेते है तो वे उसे पुनः वापस लौटाने की ताकत भी रखते हैं, इसलिए कहा जाता है कि किसी का भी अंतिम संस्कार करने में बहुत जल्दबाजी नहीं करना चाहिए ।

- कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की मौत सूर्य के दक्षिणायन होने पर, कृष्ण पक्ष, पंचक या रात्रि में हुई हो तो, इसे दोष माना जाता है, इसलिए शव को जलाने से पहले किसी रिश्तेदार के द्वारा मृतक के निमित्त 2 बटुक ब्राह्मणों को भोजन कराना या भोजन सामग्री का दान करके, व उस दिन उपवास रहकर इस दोष का निवारण कर अंतिम संस्कार कि क्रिया समपन्न करना चाहिए, इससे मृतक की आत्मा को मुक्ति मिल जाती है ।

- कहा जाता हैं कि अगर मृतक की पत्नी या घर परिवार की कोई महिला गर्भवती है तो उसे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होना चाहिए, और साथ ही अंतिम संस्कार के क्रियाकलापों से दूर रहने के साथ उसे श्मशान घाट भी नहीं जाना चाहिए ।


- शास्त्रों के अनुसार मृत्यु के बाद अंत्येष्ठी संस्कार के समय शव का सिर दक्षिण दिशा की तरफ रखना चाहिए, क्योंकि दक्षिण की दिशा मृत्यु के देवता यमराज की मानी गई है, इस दिशा में शव का सिर रख हम उसे मृत्यु के देवता को समर्पित कर देते हैं ।

- ऐसी मान्यता है कि गंगा, नर्मदा, गोदावरी, पूर्णा, यमुना, कावेरी जैसी पवित्र नदी का जल पीने या स्नान मात्र से मनुष्य के सारे ज्ञात अज्ञात पापों से मुक्ति मिल जाती हैं । यही वजह है कि दाह संस्कार के बाद अस्थियों की राख एवं अस्थियों को गंगा जी या अन्य पवित्र नदियों में प्रवाहित कर दिया जाता है, कहा जाता है कि मनुष्य की अस्थियां वर्षों तक गंगा नदी में ही रहती हैं, और गंगा जी नदी धीरे-धीरे उन अस्थियों के माध्यम से इंसान के पाप को खत्म करते हुए उस आत्मा के लिए नया मार्ग खोलती है ।