
जंग का भयावह मंजर । (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
Escalation: मध्य पूर्व में तनाव अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। ईरान ने दुनिया को स्पष्ट कर दिया है कि अब 'न तो को सीजफायर होगा और न ही कोई अलर्ट' जारी किया जाएगा। इस सख्त रवैये ने युद्ध तेज होने की आशंकाओं को भड़का दिया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार अमेरिका की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। इस भयानक तनाव के बीच सबसे बड़ा संकट उन हजारों भारतीय नागरिकों पर आ खड़ा हुआ है, जो अपने काम या पढ़ाई के सिलसिले में ईरान में मौजूद हैं। हालात के मददेनजर ही ईरान में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक तत्काल एडवाइजरी जारी की है।
यह आवश्यक एडवाइजरी आज, 7 अप्रैल 2026 को भारतीय समयानुसार शाम करीब 7:35 से 7:40 बजे के बीच मीडिया और न्यूज़ एजेंसियों में फ्लैश हुई है। यह मुख्य रूप से एक आधिकारिक सुरक्षा एडवाइजरी है। इसे दूतावास के आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल @India_in_Iran और विदेश मंत्रालय के बुलेटिन के माध्यम से नागरिकों के लिए सार्वजनिक किया गया है। तकनीकी रूप से यह कोई कानूनी "आदेश" नहीं है जिसे न मानने पर कानूनी कार्रवाई हो, बल्कि मौजूदा तनाव को देखते हुए नागरिकों की जान बचाने के लिए एक बेहद सख्त दिशा-निर्देश है।
ईरान के ऊपर हवाई यातायात पूरी तरह से बाधित हो चुका है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। ऐसे में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'स्टे इन प्लेस' (जहां हैं, वहीं सुरक्षित रहें) की सख्त एडवाइजरी जारी की है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक रूप से घरों या हॉस्टल से बाहर न निकलें और दूतावास के 24x7 सक्रिय कंट्रोल रूम के लगातार संपर्क में रहें।
इधर दूतावास लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। इससे पहले 23 फरवरी 2026 को नागरिकों को उपलब्ध उड़ानों से जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की एडवाइजरी आई थी और 3 मार्च 2026 को दूतावास ने ज़्यादातर भारतीय छात्रों को तेहरान से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया था। अब "अगले 48 घंटे स्टे-इन-प्लेस" और "इलेक्ट्रिक व मिलिट्री साइट्स से दूर रहने" का अलर्ट इस सैन्य तनाव के बीच अब तक का सबसे गंभीर और अर्जेंट कदम है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो, सामान्य दिनों में ईरान में लगभग 9,000 से 10,000 भारतीय निवास करते हैं। इनमें मुख्य रूप से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र, कारोबारी, कामगार और धार्मिक यात्रा (ज़ियारत) पर गए तीर्थयात्री शामिल हैं। मौजूदा हालात ने इन सभी की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तनाव की शुरुआत से ही भारत सरकार रैस्क्यू करने में जुटी है:
बड़े पैमाने पर वापसी: 28 फरवरी 2026 के बाद से पूरे पश्चिमी एशिया और खाड़ी क्षेत्र से अब तक लगभग 2.44 लाख भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं।
ईरान से रैस्क्यू: कॉमर्शियल उड़ानों के अलावा, भारत सरकार ने कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय तीर्थयात्रियों को आर्मेनिया और अजरबैजान के सुरक्षित मार्गों से सफलतापूर्वक बाहर निकाला है।
बहरहाल,लगातार रैस्क्यू करने के बावजूद, ईरान में फंसे भारतीयों की संख्या अभी भी काफी अधिक है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, सीजफायर से इनकार के इस तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान में अभी भी 8,500 से 9,000 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं।ईरान में फंसे छात्रों और कामगारों के परिजनों में भारी दहशत है। वे भारत सरकार से विशेष विमान भेजकर जल्द से जल्द एयरलिफ्ट करने की गुहार लगा रहे हैं।
Updated on:
07 Apr 2026 09:15 pm
Published on:
07 Apr 2026 08:09 pm
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