
छठ महापर्व की शुरुआत 31 अक्टूबर से हो चुकी है। छठ के पहले दिन नहाय खाय के साथ लोगों नें गंगा स्नान कर व्रत को प्रारंभ किया। वहीं छठ के दूसरे दिन खरना है। इस बार खरना के दिन बहुत ही शुभ संयोग बन रहा है। पंडित रमाकांत मिश्रा ने बताया की इस बार खरना के दिन रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। यही नहीं रवि योग नहाय खाय से 2 नवंबर यानी छठ के आखिरी दिन तक बना रहेगा। इस बार रवि योग में ही सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
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हिंदू धर्म में रवि योग का बहुत महत्व माना जाता है। पंडित जी ने बताया कि रवि योग सभी अशुभ योगों को दूर कर देता है। रवि योग के दिन भगवान सूर्य देव की विशेष कृपा होती है और छठ के शुभ दिन इस योग में सूर्य को अर्ध्य देने से इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है।
छठ पर्व के दूसरे दिन खरना मनाया जाता है। खरना का मतलब शुद्धिकरण से है। खरना के दिन महिलायें छठ मइया की पूजा करके उन्हें गुड़ की खीर का भोग लगाती हैं और शाम के समय घर में इसका प्रसाद बांटती हैं। महिलाओं द्वारा खीर का प्रसाद ग्रहण करते ही उनका 36 घंटों का निर्जला व्रत शुरु हो जाता है।
तीसरे दिन पहला अर्घ्य दिया जाता है। वहीं तीसरे दिन व्रतधारी शाम को अस्ताचलगामी सूर्य ( डूबते हुए सूर्य ) को अर्घ्य देते हैं और सूर्य भगवान की उपासना करते हैं। इसके बाद चौथे और आखिरि दिन दूसरा अर्घ्य यानी सुबह व्रती उदीयमान सूर्य ( उगते हुए सूर्य ) को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसके साथ ही यह महापर्व समाप्त हो जाता है। चार दिन तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व को 'मन्नतों का पर्व' भी कहा जाता है।
Published on:
01 Nov 2019 11:27 am
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