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सिटी बसों के पहियों पर पांच दिन से ब्रेक

भोपाल में पिछले पांच दिनों से छह रूटों की 149 बसों के पहिए थमे हैं।

भोपालJul 08, 2024 / 11:03 pm

Mahendra Pratap


भोपाल. शहर में पिछले पांच दिनों से शहर के छह रूटों की 149 बसों के पहिए थमे हैं। चिरायु से आकृति इको सिटी, कोलार के बैरागढ़ से कोच फैक्ट्री, कोकता से लालघाटी, गांधी नगर से अयोध्या बायपास और अन्य रूट्स पर हर रोज करीब 40 हजार लोग इससे परेशान हो रहे हैं। इससे पहले 14 जून को भी छह रूट के ड्राइबरों की हड़ताल से यात्रियों को ऑटो, टैक्सी संचालकों की मनमानी का शिकार होना पड़ा था। सबसे परेशानी महिलाओं और स्टूडेंट को हो रही
ऐसे समझें परेशानी
कोचिंग आ रहे ऑटो से
अयोध्या नगर निवासी वीरभान सिंह कोचिंग के लिए एमपी नगर आते हैं। एक बस चल रही है। दो रूट की बसें बंद हंै। ऐसे में उन्हें कोचिंग के लिए ऑटो करनी पड़ रही है।
पास का उपयोग नहीं
कोलार ललिता नगर निवासी नर्सिंग स्टूडेंट बलराम पंवार ने बताया कि एसआर 08 रूट की बस से एमपी नगर जाते हैं। 20 रुपए किराया है जबकि ऑटो वाले 200 रुपए तक मांगते हैं। बीसीएलएल के पास का कोई उपयोग नहीं है।
ऑटो को देना पड़ रहा ज्यादा किराया
निशातपुरा कोच फैक्ट्री रूट पर एसआर 08 बस चलती है। छात्रा मानषी ने बताया कि बस पास का पैसा बेकार जा रहा है। ऑटो को ज्यादा किराया देना पड़ रहा है।
बंद करनी पड़ी कोचिंग
छात्रा जया पाटीदार 116 नंबर की बस बाग सेवनिया के लिए पकड़ती हैं। लेकिन बस बंद है। ऐसे में कोचिंग बंद करनी पड़ी है। या फिर हर रोज सौ से डेढ़ रुपए ऑटो को दें।
पढ़ाई बाधित
बसों की हड़ताल के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आवाजाही मुश्किल हो गई है। कॉलेज और कोचिंग मिस हो रही है। दूसरे साधन से आना जाना भारी पड़ रहा है।जया पाटीदार, छात्रा
काम छूटा,पेट पालना मुश्किल
सिटी बसों के न चलने से हमारा काम छूट गया है। हम डेली वेजेज वर्कर हैं। एमपी नगर में आफिसों में साफ सफाई का काम करते हैं। ऑटो से रोज रोज सफर करना मुश्किल है। बच्चों को भूखा नहीं रख सकते हैं। विरोध में हमने सामूहिक रूप से सडक़ किनारे बैठकर रुदन भी किया लेकिन हमारी समस्या किसी ने भी नहीं सुनी। हड़ताल जल्द खत्म हो।
डेली वकर्स लेडीज एसोसिएशन, भोपाल
यह है विवाद की मुख्य वजह
प्रति किमी मिलने वाली राशि घटाएं: चलो एप
बीसीएलएल की बसों में टिकिट कलेक्शन एजेंसी चलो ऐप का अनुबंध है। इन्हें प्रति किमी के हिसाब से राशि बीसीएलएल देती है। एजेंसी का कहना है कि उन्हें नुकसान हो रहा है। इसलिए एजेंसी ने प्रति किमी के हिसाब से दी जाने वाली राशि घटाने की मांग की है।
राशि कम नहीं हो सकती: बीसीएलएल
बीसीएलएल का तर्क बीच में इस तरह राशि कम नहीं हो सकती है। अनुबंध के आधार पर राशि जमा करनी होगी। इस विवाद में एजेंसी ने बसों को डिपो को खड़ा कर दिया है।
जिम्मेदार बोले-शीघ्र करेंगे व्यवस्था, आज है बैठक
सीधी बात
निधि सिंह, सीइओ, बीसीएलएल
सवाल-पिछले पांच दिनों से शहर में कई रूट पर लो फ्लोर बसें बंद हंै, इसका समाधान खोज रहे हैं?
जवाब- टिकट कलेक्शन एजेंसी चलो एप बीच में ही अनुबंध तोडकऱ चली गई है, उन्होंने नुकसान होने का तर्क दिया है। इसलिए दोबारा टेंडर जारी किया गया है। एजेंसी से भी बातचीत चल रही है। इसलिए कुछ रूटों की बसें नहीं चल रहीं हैं।
सवाल- यात्रियों की सुविधा के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है?
जवाब- एजेंसी से लगातार चर्चा जारी है। दूसरी एजेंसियों की सेवाएं लेने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में मंगलवार को बैठक भी कर रहे हैं। कोई न कोई हल निकालेंगे।
सवाल- यह दूसरी बार है, जब सिटी बसों की हड़ताल से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है?
जवाब- हमारा पूरा प्रयास है कि लोगों को परेशानी न हो, एजेंसी चाहती है कि उनका कलेक्शन का पैसा कम किया जाए, यह संभव नहीं है, हम लगातार चर्चा कर रहे हैं।चलो एप एजेंसी बोली-हमें लगातार नुकसानबसों के संचालन में कंपनी को हर माह लगभग 25 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिस समय अनुबंध हुआ था, तब से अब तक कई शर्तों को तोड़ा गया। हमारे मार्ग में सीएनजी बसों का संचालन शुरू कर दिया गया, कोविड के पूर्व में संचालित हो रहे गर्वमेंट पासेस भी शुरू नहीं हुए, ऐसे में अनुबंध वित्तीय रूप से असंभव हो गया। इसके कारण हमे इसका संचालन बंद करना पड़ा। इसके लिए नियमानुसार दिसंबर 23 को छह माह का नोटिस दिया था जो 3 जुलाई को पूरा हुआ। फिर भी हम बातचीत से समस्या का समाधान तलाशनें में जुटे हैं।
हर्ष अहलेजकुरिया सिटी इंजीनियर, चलो एप

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