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आंधी-तूफान में भी नहीं डगमगाता है भगवान जगन्नाथ का पताका, यह है चमत्कार

आंधी-तूफान में भी नहीं डगमगाता है भगवान जगन्नाथ का पताका, यह है चमत्कार

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भोपाल

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Tanvi Sharma

May 03, 2019

puri jagannath mandir

धरती का बैकुंठ कहा जाने वाला मंदिर जगन्नाथ पुरी बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। जगन्नाथ पुरी हिंदुओं का प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां सालभर श्रृद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आते हैं। जगन्नाथ मंदिर की महीमा और यहां के चमत्कार देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। पुरी के इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ के साथ-साथ उनके बड़े भाई बलभद्र व उनकी बहन सुभद्रा भी विराजमान हैं। जगन्नाथ मंदिर का हर साल रथ यात्रा निकाली जाती है। यह रथ यात्रा पूरे संसार में प्रसिद्ध है। पुरी का जगन्नाथ मंदिर का आर्किटेक्ट इतना भव्य है कि दूर-दूर के वास्तु विशेषज्ञ इस पर रिसर्च करने आते हैं। इसके अलावा भी मंदिर के कुछ आश्चर्यजनक चर्चित तथ्य हैं, जो की सबको सोचने पर मजबूर कर देते हैं। आइए जानते हैं वे तथ्य...

सामान्य दिनों में हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है और शाम को इसके विपरीत, लेकिन पुरी में इसका उल्टा होता है। अधिकतर समुद्री तटों पर आमतौर पर हवा समुद्र से जमीन की ओर आती है, लेकिन यहां हवा जमीन से समुद्र की ओर जाती है।

जगन्नाथ मंदिर के ऊपर स्थापित लाल ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है। ऐसा किस कारण होता है यह कोई नहीं जानता, लेकिन यह अपने आप में आश्चर्यचकित कर देने वाली बात है। इसके अलावा यह भी आश्‍चर्य है कि प्रतिदिन सायंकाल मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़कर बदला जाता है। ध्वज भी इतना भव्य है कि जब यह लहराता है तो इसे लोग देखते ही रह जाते हैं। ध्वज पर शिव का चंद्र बना हुआ है।

यह दुनिया का सबसे भव्य और ऊंचा मंदिर है। यह मंदिर 4 लाख वर्गफुट क्षेत्र में फैला है और इसकी ऊंचाई लगभग 214 फुट है। मंदिर के पास खड़े रहकर इसका गुंबद देख पाना असंभव है। आश्चर्य की बात यह है कि मुख्य गुंबद की परछाई दिन के किसी भी समय दिखाई नहीं देती।

पुरी में किसी भी स्थान से आप मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही लगा दिखेगा। इसे नीलचक्र भी कहते हैं। यह अष्टधातु से निर्मित है और अति पावन और पवित्र माना जाता है।

मंदिर के ऊपर गुंबद के आस-पास पक्षी उड़ते नजर नहीं आते नाही इसके ऊपर से विमान उड़ाया जा सकता है। जबकि भारत के अधिकतर मंदिरों के गुंबदों पर पक्षी बैठ जाते हैं या आसपास उड़ते हुए नजर आते हैं।

500 रसोइए 300 सहयोगियों के साथ बनाते हैं भगवान जगन्नाथजी का प्रसाद। लगभग 20 लाख भक्त यहां भोजन करते हैं। कहा जाता है कि मंदिर में प्रसाद कुछ हजार लोगों के लिए ही क्यों न बनाया गया हो लेकिन इससे लाखों लोगों का पेट भर सकता है।

मंदिर के सिंह द्वार में पहला कदम प्रवेश करने पर ही मंदिर के अंदर से आप सागर द्वारा निर्मित किसी भी ध्वनि को नहीं सुन सकते। आप मंदिर से जैसे ही एक कदम बाहर निकालेंगे वैसे ही आपको लहरों की आवाज़ सुनाई देने लगेगी।