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पर्याप्त वर्षा के बावजूद तीन तालुकों में जल संकट की आशंका!

मेंगलूरु, मूडबिदिरे और उल्लाल में भूजल स्तर में गिरावट अन्य क्षेत्रों में स्तर बढ़ा, वर्षा जल संचयन और बोरवेल नियंत्रण पर जोर मेंगलूरु. दक्षिण कन्नड़ जिले के मेंगलूरु, मूडबिदिरे और उल्लाल तालुकों में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद इन तीन क्षेत्रों […]

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Despite sufficient rainfall, a water crisis is feared in three taluks!

सांदर्भिक फोटो।

मेंगलूरु, मूडबिदिरे और उल्लाल में भूजल स्तर में गिरावट

अन्य क्षेत्रों में स्तर बढ़ा, वर्षा जल संचयन और बोरवेल नियंत्रण पर जोर

मेंगलूरु. दक्षिण कन्नड़ जिले के मेंगलूरु, मूडबिदिरे और उल्लाल तालुकों में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद इन तीन क्षेत्रों में जलस्तर नीचे गया है।

अधिकारियों ने बताया कि उल्लाल तालुक में वर्ष 2022 में भूजल का अधिकतम गहराई स्तर 27.68 मीटर था, जो 2025 में घटकर 14.67 मीटर हो गया। वहीं, कडबा, बंटवाल और सुल्या तालुकों में भूजल स्तर में लगभग 4 मीटर की वृद्धि हुई है। इन तीन तालुकों को छोडक़र बाकी जिले सुरक्षित श्रेणी में हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिले के सभी तालुकों में 61 निगरानी कुओं से आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। जनसंख्या वृद्धि और कृषि-उद्यानिकी में भूजल के अत्यधिक उपयोग से स्तर में गिरावट आई है।

संरक्षण और पुनर्भरण के प्रयास

भूजल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, कुओं और बोरवेल से पुनर्भरण, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, छोटे बांधों का निर्माण और ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

बोरवेल नियंत्रण

बोरवेल खोदने के लिए स्थानीय संस्थाओं से अनुमति पत्र लेना अनिवार्य है। नियमों को और सख्त बनाने की योजना है।

व्यापक जनजागरूकता आवश्यक

भविष्य में जलस्तर बनाए रखने के लिए वर्षा जल संचयन, पुनर्भरण और व्यापक जनजागरूकता आवश्यक है। मेंगलूरु और आसपास के कुछ उद्योग वर्षा जल का संचयन कर वर्षभर उपयोग कर रहे हैं, जिसे बड़े पैमाने पर लागू करना होगा।
-शेख दावूद, वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक