
निष्पक्ष जांच और अंतिम प्रकाशन पर रोक की मांग
उज्जैन. दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से 33,256 नाम विलोपित किए जाने के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत पोरवाल द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बाद, राज्यसभा सांसद एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रीदिग्विजयसिंह ने इस मुद्दे को औपचारिक रूप से चुनाव आयोग के समक्ष उठाया है। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झाको पत्र लिखकर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान हुई कथित अनियमितताओं की सघन जांच की मांग की है।
भरत पोरवाल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से नाम काटने की प्रक्रिया में ‘फॉर्म-7’ का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। उनका कहना है कि झूठी आपत्तियों के आधार पर वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए। शिकायत में सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ/एसडीएम)कृतिकाभीमावत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही उज्जैन कलेक्टर रोशनसिंह पर भी प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। पोरवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार को भी पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने 21 फरवरी 2026 को प्रस्तावित मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को हटाकर उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की अपील की गई है। इस पूरे मामले की जानकारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुनखड़गे को भी दी गई है। अब वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के हस्तक्षेप के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। चुनाव आयोग और प्रशासन के आगामी कदमों पर राजनीतिक दलों और आमजन की नजरें टिकी हुई हैं।
Published on:
20 Feb 2026 06:20 pm
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