
gwalior high court
हाईकोर्ट की युगल पीठ ने एमडी (फिजियोलॉजी) की सीट छोडऩे पर लगाए गए 30 लाख रुपए के पेनल्टी बॉन्ड के मामले में अहम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने कॉलेज को आदेश दिया है कि छात्र के मूल दस्तावेज सितंबर 2025 तक लौटा दे। यह राहत अंतरिम आदेश के रूप में दी गई है।
दरअसल डॉ. उमेश नागर ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, शिवपुरी में ऑल इंडिया कोटा से एमडी (फिजियोलॉजी) में प्रवेश लिया था। उन्होंने 25 फरवरी 2025 को कॉलेज में अपने सभी मूल दस्तावेज़ जमा कर दिए थे। इसी बीच उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल, यूनाइटेड किंगडम से पीएचडी का ऑफर मिला। वे इस अवसर को अपनाना चाहते हैं, लेकिन कॉलेज ने शर्त रखी कि दस्तावेज तभी लौटेंगे जब वे 30 लाख रुपए सीट छोडऩे की पेनल्टी राशि जमा करें। इसको लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। डॉ नागर की ओर से तर्क दिया कि यह शर्त असंवैधानिक और छात्रों के भविष्य के लिए बाधक है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोकसभा में इस नीति पर चिंता जताई थी और नेशनल मेडिकल कमीशन ने भी 10 जनवरी 2024 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सीट-लीविंग बॉन्ड नीति की समीक्षा करने का पत्र भेजा था। इस तरह की शर्तों से छात्रों पर मानसिक दबाव पड़ता है और कई बार अवसाद एवं आत्महत्या जैसे हालात सामने आते हैं। छात्र की 30 लाख रुपए भरने की क्षमता नहीं है। राज्य शासन की ओर से तर्क दिया कि यदि कोई छात्र बीच में कोर्स छोड़ देता है तो यह सार्वजनिक धन और मेडिकल सीट दोनों का नुकसान है, क्योंकि सत्र के बीच में उस सीट पर किसी अन्य छात्र को प्रवेश नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट इन शर्तों पर दस्तावेज लौटाने का दिया आदेश
- याचिकाकर्ता शपथपत्र देकर यह आश्वासन दें कि यदि कोर्ट अंतिम निर्णय में बॉन्ड राशि जमा करने का आदेश देता है तो वे उसका पालन करेंगे।
- इसके बाद कॉलेज छात्र के दस्तावेज 2 सितंबर 2025 तक लौटा दे।
- यह आदेश केवल अंतरिम है और अंतिम सुनवाई के परिणाम पर निर्भर करेगा।
Published on:
26 Aug 2025 11:05 am
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