
startup
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआइटी) के अनुसार, जो इकाई वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से संचालित होती है उसे स्टार्टअप की अर्हता प्राप्त करने के लिए पिछले १० वर्षों में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या साझेदारी फर्म या लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप के रूप में पंजीकृत होना चाहिए। एक वित्त वर्ष में निगमन/पंजीकरण के बाद से कारोबार १०० करोड़ रुपए से अधिक न हो। इकाई को उत्पादों, प्रक्रियाओं या सेवाओं के नवाचार, विकास या सुधार से संबंधित गतिविधियों में संलग्न होना चाहिए या इसके पास रोजगार या धन पैदा करने की उच्च क्षमता वाला एक स्केलेबल व्यवसाय मॉडल होना चाहिए।
स्टार्टअप इंडिया वेबसाइट के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने व्यवसाय को पंजीकृत कर सकता है। www.startupindia.gov.in पर लॉग इन कर खाता बनाएं और उद्यम से संबद्ध जानकारी दर्ज करें। इस तरह व्यवसाय को पंजीकृत करके, व्यापार मालिकों के पास निवेशकों, सलाहकारों, इनक्यूबेटरों आदि से जुडऩे का अवसर होता है।
भारत में स्टार्टअप्स के लिए डीपीआइआइटी मान्यता अनिवार्य नहीं है। हालांकि, मान्यता प्राप्त करने से एक स्टार्टअप कुछ लाभों के लिए पात्र हो जाएगा जैसे कि फास्ट-ट्रैकिंग पेटेंट आवेदन, पेटेंट और ट्रेडमार्क फाइलिंग पर छूट, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) प्लेटफॉर्म के माध्यम से मान्यता प्राप्त करना, फंडिंग समर्थन आदि।
संपूर्ण स्टार्टअप पंजीकरण के लिए स्टार्टअप का निगमन/पंजीकरण प्रमाणपत्र, पैन नंबर, फंडिंग का प्रमाण (यदि लागू हो), कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि, एलएलपी या साझेदारी फर्म से प्राधिकरण पत्र, पिच डेक, वेबसाइट लिंक, वीडियो एवं किसी भी पेटेंट या ट्रेडमार्क का विवरण (यदि लागू हो) आदि जरूरी हैं। इसके अतिरिक्त, उनके स्टार्टअप को प्राप्त होने वाली मान्यता के किसी भी पुरस्कार या प्रमाण पत्र को शामिल करें।
हर्षा रामनानी, (सीए, रजिस्ट्रर्ड वैल्यूअर)
Updated on:
18 May 2024 06:18 pm
Published on:
18 May 2024 06:18 pm
