– अष्टमी-नवमी दोनों एक साथ मनाई, भंडारों के भी हुए आयोजन
इंदौर. इस बार नवरात्र में तिथियां घटने-बढ़ने के कारण अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर असमंजस रहा। अधिकांश लोगों ने शुक्रवार को अष्टमी-नवमी एक साथ मनाकर कुलदेवी के पूजन के साथ कन्या पूजन किया। 9 दिन मां की आराधना कर शुक्रवार को मां को विदाई दी गई। इसके साथ ही भंडारों का दौर भी शुरू हो गया है।
इस साल अष्टमी और नवमी तिथि एक दिन पड़ने से अधिकांश जगह अष्टमी और नवमी एक साथ शुक्रवार को मनाई गई। अन्नपूर्णा मंदिर में जहां नवमी शनिवार को मनाई जाएगी तो बिजासन मंदिर में शुक्रवार को मानी गई। पं. गुलशन अग्रवाल ने बताया, 10 अक्टूबर को दोपहर 12:31 से अष्टमी तिथि प्रारंभ हुई जो 11 अक्टूबर को दोपहर 12:06 पर समाप्त हुई। नवमी तिथि 11 अक्टूबर को दोपहर 12:06 से प्रारंभ होकर 12 अक्टूबर सुबह 10:58 पर समाप्त होगी।
श्रीश्रीविद्याधाम पर 1.81 लाख आहुतियों के साथ पूर्णाहुति
श्रीश्रीविद्याधाम पर नवरात्रि महोत्सव में महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सान्निध्य एवं आचार्य पं. राजेश शर्मा के निर्देशन में चल रहे सग्रहमख सहस्त्रचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति हुई। महानवमी के उपलक्ष्य में महायज्ञ में आहुतियां समर्पित की गई। इसमें कुल 1 लाख 81 हजार आहुतियां समर्पित की गई। सुबह यज्ञ में तर्पण, मार्जन एवं उसके बाद पूर्णाहूति हुई। संध्या को कन्या एवं सौभाग्यवती पूजन का क्रम जारी रहा।
हंसदास मठ पर गरबा आयोजन
विश्व ब्राह्मण समाज संघ द्वारा गरबा प्रतियोगिता का आयोजन 13 अक्टूबर को हंसदास मठ में किया जाएगा। अलग-अलग प्रतिभाएं अपने समूह की प्रस्तुतियां देंगी। दशहरा मिलन समारोह के आयोजन प्रत्येक समूह को नकद पुरस्कार दिया जाएगा। योगेंद्र महंत और पं. पवन दास ने बताया कि परशु हंस गरबा शाम 6 बजे से शुरू होगा। गरबा प्रतियोगिता नि:शुल्क रखी गई है।