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वर्क फ्रॉम होम नहीं, फ्लेक्सिबल वर्क ऑप्शन चाहिए; 10 में से 8 कर्मचारी ऑफिस आने को तैयार

JLL वर्कप्लेस प्रेफरेंस बैरोमीटर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत रिटर्न-टू-ऑफिस में सबसे आगे है, जहां 82% कर्मचारी अनिवार्य रूप से ऑफिस से काम कर रहे हैं और कार्यस्थल के माहौल को लेकर सकारात्मक हैं, लेकिन फ्लेक्सिबिलिटी अब केवल एक सुविधा न रहकर टैलेंट को बनाए रखने और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त के लिए एक अनिवार्यता बन गई है।

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भारत

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Himadri Joshi

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Hamid Zidan

Nov 05, 2025

JLL Workplace Preference Barometer report 2025

जेएलएल कार्यस्थल वरीयता बैरोमीटर रिपोर्ट 2025(प्रतीकात्मक तस्वीर)

बीते कुछ साल से कोविड के बाद कंपनियां ने अपनी वर्क फ्रॉम होम पॉलिसी का धीरे-धीरे रोलबैक शुरू कर दिया और कर्मचारियों को ऑफिस बुला रही हैं. कोई कंपनी हफ्ते में 3 दिन तो कोई 4 दिन कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम ऑफिस का ऑप्शन दे रही है। हालांकि ये ट्रेंड पूरी दुनिया में चल रहा है, लेकिन भारत रिटर्न-टू-ऑफिस (RTO) की मुहिम में सबसे आगे और सबसे तेजी से बढ़ रहा है। JLL वर्कप्लेस प्रेफरेंस बैरोमीटर 2025 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 82% कर्मचारी अब अनिवार्य रूप से ऑफिस से काम कर रहे हैं और उनमें से 10 में से 8 कर्मचारी इस नीति को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं, यानी उन्हें ऑफिस में आकर काम करने से कोई शिकायत नहीं है।

भारतीय कॉर्पोरेट्स दुनिया से चार कदम आगे

वर्कप्लेस एक्सीलेंस के मोर्चे पर भी भारतीय कॉर्पोरेट्स दुनिया से चार कदम आगे दिखते हैं। क्योंकि 83% भारतीय कर्मचारी अपने वर्कप्लेस को एक आदर्श वातावरण बताते हैं, जो कि एशिया पैसिफिक के औसत 64% के मुकाबले कहीं ज्यादा है। जिन सेक्टर्स ने रिटर्न टू ऑफिस को तेजी से अपनाया है, उसमें टेक्नोलॉजी कंपनियां, बैंकिंग, सर्विसेज और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस (BSFI) और एजुकेशन सेक्टर शामिल हैं।

फ्लेक्सिबिलिटी एक बड़ा फैक्टर

रिपोर्ट में फ्लेक्सिबिलिटी के बिंदु पर रौशनी डाली गई है, जिससे कंपनियों के बिजनेस पर काफी बड़ा असर दिख रहा है। 60% भारतीय कर्मचारी नौकरी बदलते समय लचीलापन को सबसे अहम फैक्टर मानते हैं, जो कि एशिया पैसिफिक औसत 54% से ज्यादा है। ये आंकड़ा बताता है कि वो कंपनियां जो फ्लेक्सिबल वर्क ऑप्शंस देती हैं, वे टॉप टैलेंट को आकर्षित करने में अपने कंपटीटर के मुकाबले अच्छी बढ़त बना लेंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि कर्मचारियों की इस सकारात्मक भावना को बेहतर प्रोडक्टिविटी में बदलने के लिए तीन-स्तर पर काम करना होगा

टाइम मैनेजमेंट और कर्मचारियों का हित

अभी कंपनियां हाइब्रिड मॉडल पर फोकस कर रहीं हैं, जिसमें कुछ दिन घर से और कुछ दिन ऑफिस से काम करना होता है। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि बेसिक हाइब्रिड मॉडल से आगे बढ़कर कंपनियों को ऐसा शेड्यूल बनाना होगा जो कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों का सम्मान करे और साथ ही टीम कनेक्टिविटी बनाए रखे। इस रिपोर्ट में 28% कर्मचारी ऐसे भी हैं जो वर्क लाइफ बैलेंस, यात्रा की दिक्कतों और प्रोडक्टिविटी से जुड़े मुद्दों को लेकर नकारात्मक भावना रखते हैं। इसलिए इन चिंताओं को व्यवस्थित रूप से दूर करना होगा।

वर्कप्लेस फ्लेक्सिबिलिटी अब सुविधा नहीं बल्कि अनिवार्यता

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि केवल पॉलिसीज में नहीं बल्कि वर्क कल्चर में भी फ्लेक्सिबिलिटी लानी होगी और विश्वास का माहौल बनाना होगा, जिससे कर्मचारी न सिर्फ खुश रहें बल्कि कंपनी के प्रदर्शन को भी ऊंचा उठाएं। रिपोर्ट बताती है कि भारत में कर्मचारियों के हित एक बड़ा सवाल भी है और बड़ी चुनौती भी है। 54% कर्मचारी मध्यम से लेकर उच्च स्तर के बर्नआउट का सामना कर रहे हैं। इसका सीधा असर ऑर्गेनाइजेशनल परफॉर्मेंस पर पड़ रहा है, जिसकी वजह से कंपनियों में कर्मचारियों के छोड़ने की समस्या बढ़ रही है। 10 में से 6 कर्मचारी अब केवल फ्लेक्सिबल वर्क अरेंजमेंट्स को देखकर ही किसी नई कंपनी को काम करने के लिए चुन रहे हैं। वर्कप्लेस फ्लेक्सिबिलिटी अब सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त की अनिवार्यता बन चुकी है।